जहां कभी नहीं जीते नहीं जीतने के बीजेपी नेता

सांसदों, राज्यसभा सदस्यों और एमएलसी को दी जिम्मेदारी

लखनऊ। जहां कभी खाता नहीं खुला वहां जीत दर्ज कराने को बीजेपी इस बार बेताब है। करीब पांच दर्जन विधानसभा सीटे ऐसी है कि वहां भाजपा के उम्मीदवार कभी जीत नहीं सकें हैं। मिशन 2022 में आंकड़ा 300 प्लस चाहती है बीजेपी किंतु इसी के साथ जहां कभी जीत का जश्न नहीं मना पाये वहां भगवा लहराने की कसक पूरी करने की रणनीति तैयार है। यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल तैयारी में जुट गए है। बीजेपी सत्ता दोबारा चाह रही है तो सपा और बसपा का भी सिंहासन चाहिए। बीजेपी का दावा है कि इस बार भी वो 300 से ज्यादा सीटें जीतकर अपनी सरकार बनायेगी। उत्तर प्रदेश की कई सीटें ऐसी हैं जिन पर बीजेपी कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी है। इनमें अंबेडकर नगर की अकबरपुर, आजमगढ़ की निजामाबाद सीट, सीतापुर की सिधौली सीट, रायबरेली की हरचंदपुर सीट, लखनऊ की मोहनलालगंज सीट, रायबरेली की रायबरेली सदर सीट, कानपुर की सीसामऊ सीट, आजमगढ़ की आजमगढ़ सदर सीट, प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट, इटावा की जसवंतनगर सीट, रायबरेली की ऊंचाहार सीट, जौनपुर की मल्हनी सीट, आजमगढ़ की अतरौलिया सीट, आजमगढ़ की मुबारकपुर सीट आजमगढ़ की गोपालपुर सीट प्रमुख हैं। बीजेपी हाईकमान की चिंता स्वाभाविक है क्योंकि बीजेपी की लहर इधर तक नहीं पहुंची। अब यह सीटे प्रतिष्ठा का सबब बन चुकी हैं। दावा है 300 प्लस का है तो दावे को हकीकत में बदलने के लिए बीजेपी अलग रणनीति पर काम कर रही। बीजेपी का जोर 60 से ज्यादा उन सीटों पर है जहां पार्टी आज तक कभी भी विधानसभा का खाता नहीं खुला है। इन सीटों पर फतह के लिए पार्टी ने जीत की जिम्मेदारी एमएलसी, सांसदों, राज्यसभा सांसदों, बोर्ड और निगम के अध्यक्षों और पार्टी के पदाधिकारियों को सौंपी है। 2017 में बीजेपी ने सहयोगियों के साथ मिलकर 325 सीटें जीती थी। बावजुद इसके 80 सीटें ऐसी थी जहां न बीजेपी जीत पाई और न उसके सहयोगी दल। बीजेपी का फोकस इन्हीं सीटों पर कमल खिलाने की तैयारी पर है। इसके लिए रणनीति भी बन रही है. पार्टी का पूरा फोकस है कि 2022 के चुनाव में इन सीटों पर कब्जा किया जाए। इसके लिए पार्टी ने हर सीट पर अलग-अलग प्रभारी भी नियुक्त किए हैं। इन सीटों को जिताने की जिम्मेदारी पार्टी ने अपने विधान परिषद के सदस्यों, राज्यसभा सांसदों, निगम, बोर्ड और आयोग के अध्यक्षों को सौंपी है। बीजेपी नेतृत्व दायित्व तय करने के लिए कई बार बैठक की है। दिल्ली में नड्डा सांसदों को टिप्स दे चुके हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री भी दिल्ली में दिशा निर्देश पा चुके। लक्ष्य तय है बस कब्जा करने की जुगत लगानी है।