एक नजर इधर भी -बाबा जंगू दास के हृदय परिवर्तन का प्रत्यक्ष गवाह है बद्धूपुर का हनुमान मंदिर

                                          

जखनियां/ गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर पश्चिमांचल देहात क्षेत्र में विरनो विकासखंड के विरनो थाना अंतर्गत गाजीपुर आजमगढ़ मुख्य मार्ग पर उत्तर दिशा में बद्धूपुर ग्राम पंचायत के दिलावर पट्टी पोखरे पर स्थित भव्य हनुमान मंदिर मे एक साथ सभी देवताओं का दर्शन अपने आप में अद्भुत है ।जो आज भी काफी चर्चा का विषय है । नहीं चाहते हुए भी लोगों का ध्यान बरबस आकर्षित होना आश्चर्य है ।आध्यात्मिक स्रोतों के आधार पर हाड़ मांस से बने मंदिर रुपी शरीर में जब भक्ति भावनाओं का संचार होता है तब प्रेरित मन अमिट छाप छोड़ने को विवश हो जाता है।इस बात की पुष्टि स्वयं तुलसीदास की चौपाइयां भी करती हैं कि 'जा पर कृपा राम की होई----तो कहना ही क्या? अत्यंत गरीब राजभर परिवार में जन्मे मंदिर के संस्थापक बाबा जम्मू दास जी स्वयं के नश्वर शारीरिक जीवन में सब कुछ कर गुजरने के बाद अभिलषित मन रस्मि के प्रकाश से प्रकाशित हो जन-गण-मन को  आलोकित करने का प्रयास किया वह सदा अविस्मरणीय रहेगा।आज भले ही भक्ति के सागर में आकंठ डुबकी लगाने तथा भगवत प्रेमियों को डुबकी लगवाने वाले बाबा जंगू दास हम‌ सबके बीच नहीं हैं प्ररन्तु उनकी यश बर्धिनी कृति आज भी उनकी‌ यादें ताजा कर देती है। अत्यंत गरीब राजभर परिवार में जन्मे मंदिर के संस्थापक बाबा जम्मू दास ने अपना अनमोल कीर्तिमान आज एक अविस्मरणीय थाती के रूप में  सबके लिए छोड़ा है। अबतक स्थापित विभिन्न झांकियों के निर्माण में लगभग ढाई दशक का समय लगा है फिर भी पूर्णता की स्थिति में आज भी नहीं लगता।कब तक एक संत के मन की  चीर अभिलाषा  समापन होगा यह कह पाना असंभव है ।इसलिए की इच्छाओं का अंत नहीं ।सुदूर क्षेत्रों से भिक्षा मांगकर देहात से लेकर शहर तक, व्यक्तिगत से लेकर संस्थागत तक ,भगवत भक्तों से लेकर साधारण जन तक ,राज्य परिवहन से लेकर प्राइवेट पथ चालित गाड़ियों तक के 10 पैसे और 5 पैसे के चंदे के सहयोग से जिस कार्य को अंजाम दिया गया है एक अद्भुत और मिशाल है।  मंदिर मूर्ति के निर्माण में विभिन्न कलाकारों में मुख्य रूप से राजमिस्त्री श्याम देव राजभर ताजोपुर का नाम उल्लेखनीय है।आइए आज आस्था और विश्वास से अभिसिंचित साधक और साधना का  परिचय कराते हैं। सर्वप्रथम निर्मित पश्चिम तरफ के हनुमान मंदिर के भूतल पर प्रवेश द्वार पर दक्षिण तरफ से हनुमान मकरध्वज युद्ध, मध्य भाग में अहिरावण का वध, हनुमान द्वारा चंडिका देवी श्री राम लक्ष्मण के मुक्त की आकर्षण झांकी साथ में हनुमान का पंचमुखी रूप दर्शनीय है ।द्वितीय तल पर भरत द्वारा उड़ते हनुमान पर बांण संधान तथा दक्षिण तरफ दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध लक्ष्मी सरस्वती गणेश की अनुपम झांकी उत्तर तरफ महाकाली का शिव द्वारा शर्मिंदित होना साथ ही चतुर्दिक मध्य भाग में राम लक्ष्मण सीता एवं एक महर्षि की झांकी बहुत ही मनोरम है। तृतीय तल पर 17 सोपान बाद पूरब तरफ हिरण कश्यप वध के साथ कृष्ण द्वारा कंस का वध, इसके अलावा एक सुंदर छोटी सी टंगी हुई दान पेटिका है ।दक्षिण तरफ शिव पार्वती के साथ कृष्ण राधिका की मनोहर झांकी ,पश्चिम तरफ पूतना वध कृष्ण द्वारा माखन चोरी, उत्तर तरफ कृष्ण को लेकर वासुदेव का जमुना पार होना ,चतुर्दिक मध्य भाग में शेष शैया पर सोए क्षीर सागर में विष्णु का लक्ष्मी जी द्वारा चरण दबाए जाना अत्यंत सुखमय झांकी है।अंत में चतुर्थ तल पर हनुमान द्वारा धौलागिरी धारण करके उड़ने की झांकी विद्यमान है ।दूसरी तरफ स्थापित आकर्षक झांकियों का दृश्यअद्भुत आनंद से भर देता है। संयुक्त प्रवेश द्वार के अंदर बाएं तरफ लक्ष्मण शक्ति तथा एक बड़े हाल में चतुर्दिक शीशे में कैद क्रमशः पूर्वी दीवाल के अलमारी के पास लटकती ऑटोमेटिक घड़ी के करीब एक भक्त का चित्र एवं उसके पास छोटे से शीशा जड़ित बाबा जंगू दास की तस्वीर, शिव और हनुमान का अर्धनारीश्वर रूपात्मक झांकी, महाकवि कालिदास की मूर्खता की झांकी जिस डाल पर बैठा होना उसी डाल को काटा जाना, इसके बाद एक भक्त का भजन मुद्रा, रावण का सीता से भिक्षा मांगना और सीता का रेखा होकर  दान करना ,मध्य भाग में श्रवण कुमार द्वारा माता पिता को कांवर में बिठा कर तीर्थ यात्रा पर जाना ,मध्य भाग में ऊपर राजा हरिशचंद द्वारा एक हिरणी के बध का प्रयास, द्वितीय तल पर 16 सोपान बाद यशोदा द्वारा दधी मथा जाना साथ ही कृष्ण द्वारा मटकी का फोड़ा जाना  आनंद पूर्ण झांकी है। मंदिर के तृतीय तल पर वासुदेव द्वारा कृष्ण को जमुना पार कराने की झांकी बहुत ही सुख कारी है।निर्मित मंदिर की समस्त झांकियां विद्युत स्वचालित है। जिसे देख कर मन के पाप धुल जाते हैं। जीवन के समस्त झंझावातों व्यवधानों और असामाजिक असह्य तीक्ष्ण बाणों को सहन करते हुए बाबा जंगू दास ने जो ख्याति अर्जित की  वह आज भी बहुतों के लिए  दिवास्वप्न है।आज से लगभग डेढ़ दशक पहले  मुझसे एक भेंटवार्ता में उन्होंने ने अपनी मन की जिज्ञासा जाहिर करते हुए  लंकापुरी की झांकी निर्माण का कार्य  भविष्य में पातालपुरी, रासलीला केंद्र की अनुपम झांकी ,नंद यसोदा का गांव ,लकवा पोलियों, गठियाबाद जैसे रोगियों के

 सेवार्थ कार्य कराने की अभिलाषा थी। मंदिर से सटे उत्तर विमल सरोवर के सुंदरीकरण के कार्य का उद्घाटन परिवहन विभाग के सौजन्य से सन 1993 में संपन्न हुआ था जिसका निर्माण कार्य चल रहा था चल रहे कार्य के अंतर्गत विमल सरोवर की सुव्यवस्थित चारदीवारी कराने के उपरांत छायादार वृक्षों के अलावा रावण की अशोक वाटिका बनाने के भी इच्छा जताया था।लिए साथ ही मंदिर पर प्रमुख त्योहारों  जैसे दिवाली होली रामनवमी विजयदशमी रक्षाबंधन महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर मेला आयोजित करने की भी प्रबल इच्छा थी। पर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था।काल के क्रूर पंजों ने एक ही झपट्टा में मंदिर के संस्थापक को सदा सर्वदा के लिए छीन लिया।

गौरीशंकर पाण्डेय सरस