---- तीखा तीर -----

प्रकृति  से  यदि  टकराओगे 

तो   हो  जयेगी   दूर्गति  

सभी चराचर जीव, पवन-जल 

मौसम हो  य़ा  हो  पर्वत 

स्वत:  संतुलित  कर  लेती 

जब  पड़ती इसकी ज़रुरत 

नफरत  को  प्यार  में  बदलो 

आ  गई  इसकी  ज़रुरत 

----- वीरेन्द्र  तोमर