मूक आँखें क्यों शोर मचाती हैं

विपुल नयन में नीर कण,

अवसाद छलके नीलम बन।

मौन अधर जाने क्या कह जाती है,

मूक आँखें क्यों शोर मचाती हैं?


मंजुल मुख मुकुर निहारे,

दर्शन दो अब मोहन प्यारे।

पाषाण हृदय,याद मेरी न आती है,

मूक आँखें क्यों शोर मचाती हैं?


तममय मेरे जीवन में बिंदु तुम तुहिन के,

तृषित मरुभूमि में झोंके मलयानिल के।

तेरी यादों में राधा रोती और मुस्काती है

मूक आँखें क्यों शोर मचाती हैं?


रीमा सिन्हा (लखनऊ)