संस्कृति प्राचीन गाथाओं से जोड़ते धार्मिक सिरीयल

कहते हैं सोशल मिडिया लाभप्रद भी है तो सोशल मिडिया से ही बहुत से नुसान भी हैं।सच सोशल मिडिया कुछ मामलों मे बहुत ही अधिक लाभप्रद साबित हुआ और जिस क्षेत्र मे हमारे टेलीविजन से प्रसारित सीरियल जो की बहुत से लोगों के दिलों से विलुप्त हो रही या जिससे हमारी नवयुवा पीढ़ी अनभिज्ञ है।उससे जोड़े रखने का सराहनीय कार्य आज मिडिया क्षेत्र बहुत ही सराहनीय रुप से कर रहा है और वो प्रसारित होने वाले सीरियल है अलग-अलग प्राचीन गाथाओं पे आधारित धार्मिक सीरियल जिनके बारे मे हमारे नवयुवा पीढ़ी या समस्त जन व्यस्तता के चलते धार्मिक ग्रंथों को पढ़ नहीं जान सकती।एसे मे ये महान कार्य का जिम्मा सोशल मिडिया ने अपने कांधों पर उठा लिया है।आज बहुत सी वेदों,पुराणों मे लिखी गाथाओं को कलाकारों के माध्यम से चलचित्र के रूप मे प्रसारित कर हमारी संस्कृति से जोड़ा जा रहा है।सभी की रूह को छूते ये धार्मिक कड़ियाँ कुछ नया संदेश देते हुए नवयुवा पीढ़ी का बेहतरीन मार्गदर्शक बन उन्हें सही राह पे चलने के लिये प्रेरित कर रही है।इन कलाकारों के द्वारा हर धार्मिक किरदार के रुप मे कला मे इस कदर जान भर दी जाती है की हर किरदार सभी को अपने संग बांधे रखता है।साथ ही इन कलाकारों की खूबसूरती मन मे रमणीक भाव भर आकर्षित कर ही लेते हैं।सोशल मिडिया के बहुत से टेलीविजन चैनलों पे अलग-अलग प्रसंगों पर या ये कह सकते की अलग-अलग देवताओं की लीलाओं चमत्कारों पर सीरियल बनाऐ गये हैं।जैसे..महादेव,राधेकृष्णा, जय मां वैष्णों,रामायण महाभारत आदि जो हमारे मार्गदर्शक बन हमारे संस्कारों मे वृद्धि कर हमें संस्कृति से जोड़े रखते हैं।साथ ही बहुत से धार्मिक चैनलों के माध्यम से सतगुरुओं द्वारा नित वेद गाथाओं को सुना सतसंग कर हमारा कल्याण करते हैं या किसी धार्मिक स्थलों का से सीधा प्रसारण जैसे आरती दिखा दिन को खुशियों से भर देते हैं।मंत्रों उच्चारण संग मां का श्रृंगार सतसंग मां वैष्णों दरबार से सीधा प्रसारण देख घर बैठे ही मां का दर्शन पाके जैसे जीवन सार्थक सा प्रतीत होने लगता है।सोशल मिडिया के जरिये विभिन्न धर्मों से जुड़े चैनल के कार्यकर्ता सभी को अपने धर्मों से जोड़े रखने की अहम भूमिका निभा रहे हैं।चाहे ये सोशल मिडिया की कमाई का जरीया हो पर सभी के दिलों मे धर्म के प्रति सम्मान संस्कृति को जिंदा रखने साथ ही प्राचीन गाथाओं शुरवीरों की कहानियों से जोड़े रखना कोई साधारण कार्य नहीं है।बल्कि किसी को जोड़े रखना अपनी माटी संस्कृति से महान काम है।जिन वीरांगनाओं या वीरों के बारे मे हमारी आधुनिकता मे जीवन बिता रही युवा पीढियों को नहीं पता था वो सोशल मिडिया के जरिये ही नाटय रुपांतरण रुप मे महान शूरवीरों की गाथाओं को देख बहुत ही उत्साह वर्धक हो रहे हैं।देश के लिये किस कदर शूरवीरों ने अपना सर्वस्व किस तरह बलिदान कर दिया किस कदर उनका रहन सहन था वेशभूषा इत्यादि बहुत ही अद्भुत इतिहास से परिचित हो जागरूक भी हो रहे हैं।सोशल मिडिया के जरिये हाल ही मे प्रसारित हो रहे सिरीयलों मे अहिलया बाई की गाथा का बाल रुप लोगों के दिलों को मोहित कर चुका है किस कदर अहिलयाबाई ने नारियों के लिये भी शिक्षा का द्वार खोलने का अलख जगाया और बहुत से रुढ़िवादी रीतिरिवाजों मे परिवर्तन लाके एक नवीन क्रांति को चिंगारी देने का कार्य किया जो एक प्रेरणा का ही स्त्रोत है।सोशल मिडिया वह जरिया है जो मानवता को धर्म,संसकारों, इतिहास,और अपनी संस्कृतियों से जोड़े रखने का माध्यम है।साथ ही सोशल मिडिया हमें घर बैठे ही बड़े धर्मस्थलों के दर्शनार्थ करा जीवन सफल करने का जरिया भी तो है ये सोशल मिडिया।इस सोशल मिडिया का सही प्रयोग कर लाभान्वित हो जीवन को अपनी माटी संस्कृति से जोड़े रखें।


वीना आडवानी"तन्वी"

नागपुर, महाराष्ट्र