चौपाई

जय राघव जय रघुकुल चंदन,

जोडू  हाथ  करूं   मैं  वंदन।

नइया   पार    लगाने   वाले,

सद्बुद्धि   तुम  दिलाने  वाले।

भाव  सुमन  श्वासो  से पूजा,

प्रभु बिन और  नहीं है दूजा।

मां शबरी के फल को चखते,

भक्तों के तुम मान को रखते।

तुम विदुर के साग  को खाए,

आस्था का मतलब समझाएं।

रंक   को   राजा  तुम  बनाते,

भवसागर  से   पार    लगाते।

आ   गई   मैं   शरण   में   तेरे,

क्षमा  करो  सब  अवगुण मेरे।


कामिनी मिश्रा,वरिष्ठ गीतकार कवयित्री 

व शिक्षिका,स्वतंत्र लेखिका व स्तम्भकार,

बीघापुर-उन्नाव, उत्तर प्रदेश