कुंडलियां

मीत साजि के पीत पट ,अंजन काढ़ै नैन ।

केसरिया मुस्कान पर ,खोवत हिय का चैन।।

खोवत हिय का चैन , दरस है सरस सुहावन । 

झरै हृदय अनुराग  , लगे गारी मनभावन ।।

कहता ऋतु मन आज ,आधी अपनी यह प्रीत ।

नैनन जोहत बाट ,अब आन मिलो मन मीत ।।


प्रात है भैरव गाता , कोकिल देती तान ।

पाखी भी सुर दे रहे , मधुरस मीठा गान।।

मधुरस मीठा गान , पवन ने सरगम छेड़ा ।

नर्तक बन सारंग , लिया  नृत्य  का  बेड़ा ।।

कहता ऋतु मन आज ,खिले मन खिले हैं गात।

नेह  सुर  बिखेरती , कमनीय कांतिमय प्रात।।


ऋतु श्रीवास्तव 

   (हापुड़)