घरों में बंद बच्चे हो रहे हैं तनाव का शिकार, जानें कैसे इस समय रखें उनका खास ख्याल

कोरोना वायरस महामारी ने केवल बीमारी ही नहीं बल्कि कई सारी मुसीबतें भी लोगों के लिए खड़ी कर दी हैं। जहां युवा बेरजोगारी से जुझ रहे हैं तो वहीं व्यापारी अपने बिजनेस की वजह से परेशान है।  इतना ही नहीं घरों में बंद बच्चे भी तनाव की चपेट में आ रहे हैं। कोरोना संक्रमण के फैलने के डर से, घर और बाहर दोनों जगह पाबंदियों का सामना कर रहे लोग खासकर बच्चे मेंटल हेल्थ से जुझ रहे हैं। लॉकडाउन, स्कूल बंद, दोस्तों से दूरी होने के चलते हंसने-खेलने का समय गंवा रहे मासूम अवसाद और तनाव जैसी जटिल मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, जिससे वह डिप्रेशन की तरफ जा रहे हैं। 

कोरोना काल में मेंटल हेल्थ से जुझ रहे बच्चों की संख्या में 24 फीसदी का हुआ इजाफा- 

सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के हवाले से कहा जा रहा है कि मेंटल हेल्थ से जुड़े विभागों में पहुंचने वाले बच्चों की संख्या में 24 फीसदी तक इजाफा हुआ है। इनमें 5 से 11 साल के आयुवर्ग वाले बच्चे शामिल हैं। मानसिक स्तर पर परेशान इन मासूमों के चलते अभिभावक भी चिंतित हैं, हालांकि, ऐसी कोई बीमारी या परेशानी नहीं है जिसका हल नहीं निकाला जा सकता। आईए जानते हैं इस समय में बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करें-

बच्चों को बताएं आप उनसे कितना प्यार करते हैं- 

अमेरिकन फाउंडेशन फॉर सुसाइड प्रिवेशन कि क्रिस्टिन माउटियर  मेंटल हेल्थ से जुझ रहे बच्चों के लिए सुझाव देती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे कहती हैं कि बच्चों को यह अहसास दिलाएं कि आप उनकी चिंता करते हैं और उन्हें प्यार करते हैं। इससे बच्चे अपनी बात खुलकर कह पाएंगे, उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि एक साथ हर चैलेंज को पूरा कर सकते हैं।

इस कंडीशन में डॉक्टर, टीचर और एक्सपर्ट्स से बात करें-

विशेषज्ञ के अनुसार,  बच्चे चाहते हैं कि उनकी बात को सुना जाए। उन्होंने कहा कि अगर परेशानी का पता चल जाए, तो समाधान में आसानी होती है। अगर बच्चा अपनी बात कहने में हिचक रहा है, तो बच्चों के डॉक्टर, टीचर जैसे किसी एक्सपर्ट्स से बात करें. इस बात की काफी संभावना है कि ये जानकार बच्चों को अपनी बात खुलकर कहने के लिए तैयार कर सकते हैं। अगर तमाम कोशिशों के बावजुद बच्चा आपके सामने अपनी बात नहीं रखता तो अंत में आप काउंसलर की मदद लें। 

बच्चों को अकेला बिल्कुल ना छोड़ें, नहीं तो...

किसी न किसी कारणवश अकसर बच्चे पहले से परेशान होते है, जिस वजह से भी वह अपनी बात नहीं कह पाते हैं। हो सकता है कि उन्हें यह लगता कि अगर वे अपने परेशानी साझा करते हैं, तो कोई उनके बारे में क्या सोचेगा। ऐसे में संकोच को दूर करने के लिए आपउनके अच्छे मित्र बनें जिससे वह आप पर विश्वास बना सकें।. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों को अकेला बिल्कुल ना छोड़ें। इससे उनके अंदर नेगटेविटी आ सकती हैं, जोक आगे चल कर उनके लिए बेबह खतरनाक साबित हो सकती हैं।