॥ विचार वाणी ॥

क्रोध में निर्णय ना कीजीये

क्रोध की निर्णय देत हानि

मन चित्त को शांत राखिये

संयम रखिये नीज वाणी


मात पिता की सलाह मानिये

बिना मूल्य के हैं अनुभवी ज्ञानी

उचित अनुचित पहचानिये

विराम दें अपनी मनमानी


सदैव सत्यपथ अपनाईये

सत्य में होत कभी ना हानि

असत्य की दलदल में ना जाइये

डूब जाता है इसमें महाज्ञानी


अपना सबको मान आईये

जग है एक प्रेम कहानी

बहते बहते दिन गुजारिये

सुख दुःरव की है रवानी


मन में बैर ना पालिये

बैरी से खुद की हानि

भाईचारा अपनाईये

जग है प्रेम दिवानी


अच्छी निगाहों से झांकिये

सब है अपनी ही नानी

बुरी चश्मा उतारिये

इज्जत है अगर बनानी


मद की दरिया में ना तैरिये

तेज रफ्तार में है बह जानी

परहेज बुराई से राखिये

इज्जत जग में है पानी


अभिमान से खुद को बचाईये

डुबा देती है सबकी कहानी

सदाचार ही अपनाईये

सम्मान की फसल है उगानी


उदय किशोर साह

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