दो हजार में खरीदकर दो सौ में बेच रहे आलू

लखनऊ। फर्रुखाबाद, कन्नौज और अड़ोस पड़ोस के जिलों में आलू मुख्य नगदी फसल है। सारा दारोमदार किसानों का आलू पर होता है। बच्चों की पढ़ाई और शादी विवाह इसी को बेचकर करते हैं लेकिन इस बार तो निराश हो गये हैं। आलू किसानों की इस साल उल्टी गिनती शुरू हो गई है। किसानों ने 2 हजार रुपये प्रति बोरी आलू खरीद कर बोया था। आज आलू के भाव औधे मुंह गिरने से किसान दो सौ रुपये प्रति बोरी आलू बेचने को विवश है। पिछले वर्ष इसी समय आलू दो हजार रुपये प्रति बोरी बिक रहा था। सर्वाधिक आलू पैदा करने वाले किसान नारद सिंह की माने तो इस समय किसानों का शीत गृह में भंडारित आलू माटी के मोल बिक रहा है। किसानों को शीत गृह का भाड़ा निकाल दो सौ रुपये प्रति पैकेट के दाम मिल रहे हैं जिससे आलू किसानों के लागत के दामों में भारी घाटा हो रहा है।आलू के भाव गिरने से अन्नदाता करोड़ों के कर्ज के दलदल में डूब गया है। आलू किसान सुरेंद्र का कहना है कि किसानों ने बैंक से ऋण लेकर आलू तैयार किया था। भाव गिर जाने से अब किसान बैकों का कर्ज कहां से चुकायेगा। इस चिंता ने किसानों के दिन का चौन और रात की नींद छीन ली है। एक कोल्ड स्टोरेज के मालिक ने बताया कि इस साल शीतग्रहों से आलू की निकासी न के बारबर हो रही है। अन्य प्रदेशों के व्यापारी यहां आ नही रहे है। आलू की निकासी नहीं हो पा रही है। आलू की निकासी कम होना आलू के भाव और नीचे गिरने के संकेत हैं। जिस तरह आलू के भाव औधे मुंह गिरे हैं उससे स्पष्ट हो गया है कि किसान मंदी के चलते अपना भंडारित आलू शीतगृहों में ही छोड़ जायेगा। वर्ष 2000 की तरह शीतगृह मालिकों को अपने पैसे से आलू फेकना पड़ेगा। जरा से दागी आलू में व्यापारी हाथ नहीं लगाता है।पूर्व जिला आलू विकास अधिकारी एपी सिंह बताते हैं कि इस साल फर्रुखाबाद जिले 40 हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार की गई थी जिसमें 12 लाख मेट्रिक टन आलू पैदा हुआ। छह लाख मेट्रिक टन आलू को किसानों ने औने-पौने में बेच दिया।छह लाख मेट्रिकटन आलू जिले के 80 शीतगृहों में भंडारित कर दिया। 4 लाख मेट्रिक टन आलू अब भी शीत गृहों में भंडारित है। बाहर की मंडियों में आलू की मांग न होने से निकासी कछुआ गति से हो रही है जिससे किसान परेशान है। किसानों को आलू में इस साल भारी घाटा हो रहा है।