सरकार हित मे समझाती जनता नजरअंदाज कर जाती

भारत देश की जनता जैसे अपने ही नियम कानून कायदे बना अपने ही हिसाब से बस चल रही हमारे देश के वरिष्ठ कितना समझाते देश के हित और साथ ही जनता के हितों को भी ध्यान रख कर फिर भी जनता तो जनता है। आज हमारे आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी जो की यूपी के वरिष्ठ पदाधिकारी है जिन्होंने अपने उदबोधन के माध्यम और नवीन नियमावलियों के तहत देश की बढ़ती जनसंख्या पे बोला और सन् 2021 से 2030 तक के लिये नियमावली को लागू कर उसे सम्मान देते हुए सभी को नियम को अपनाने को कहा, पर क्या जनता समझ सकेगी इस सवाल ने मन और कलम को आतूर कर दिया बस लिखने को।कोरोना काल के सन् 2020 से शुरु होने से लेके आज तक विभिन्न गाईड लाईनों को जारी किया गया देश की अधिक से अधिक जनता को बचाने के लिये ताकी जनहानी ना हो और लोग अपने घरों मे सुरक्षित अपनों संग रह सके साथ ही कोरोना महामारी की चैन जल्द तोड़ इस भयावह महामारी को बढ़ने से रोका जा सके।पर हमारे देश की जनता समझने को तैयार ही कब थी चल पड़ते लाकडाऊन के दरम़िया भी मार्निंग वाक का बहाना कर,दूध लाने या वगैरह वगैरह बहाने बना बस चल देती गलियों रास्तों मे जैसे कोरोना महामारी कोई छुटपुट सी बिमारी हो और उससे तो यूं चुटकी बजाते ही हरा देंगे।परंतु जनता इन नियमों का उलंघन कर बहुत ही भयावह लहर से रुबरू हो ना जाने अपने ही कितने अज़ीजों को खो चुकी है।एक-एक सांस की भीख मांगते अपनों के लिये इसी जनता को डाक्टरों मेडिकल स्टोरों आदि पर भटकते देखा है।हमारे वरिष्ठों द्वारा बनाऐ नियमों को तो जैसे कागज़ समझ उसी का हवाईजहाज उड़ाते पाया गया ।कितना प्रचार पसार मिडियाकर्मीयों द्वारा किया गया ।जब मिडिया कर्मी रोड पे निकलते सर्वे करने के लिये की लाकडाऊन का कितना पालन हो रहा तो देख हैरान रह जाते लोग बिना मास्क के ऐसे घूमते जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो या कुछ तो मिडियाकर्मीयों और उनके कैमरों से मुंह छुपाऐ यहां वहाँ भागने लगते हैं।सब्जी मंडी हो या कोई भी बाजार का इलाका बस थोड़ी छूट क्या मिल जाऐ लाकडाऊन मे सब टूट पड़ते बाजारों मंडियों मे जैसे कैद से कोई पंछी निकला हो।जो तड़प रहा था बस पिंजरे मे।कोरोना काल मे अनगिनत बुरे अनुभवों से परिचित हो जनता बहुत बुरा दौर देख चुकी है और अभी भी इस कोरोनाकाल के बुरे दौर से गुज़र रही है अभी ये मुसीबत टली नहीं है।जिस तरह हमारे देश की जनता कोरोनाकाल मे बने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपने ही बनाऐ नियमों पे बस चली जा रही थी जिसका परिणाम चाहे ही बहुत बुरा हो।सवाल ये है अब क्या जनता आज जनसंख्या दिवस के उपलक्ष्य मे बने नये नियमों के तहत पारित सन् 2021 से 2030 तक के नियमों को सम्मान देते हुए मानेगी।आज देश कोरोना वायरस के तहत देश के हर एक नागरिक की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है इस बुरे दौर और बढ़ती महंगाई के चलते आज घर को सही रुप से चलाना असमर्थ सा हो गया है क्या अमीर क्या गरीब सभी की जमा पूंजी ये कोरोनाकाल जनहानी के साथ -साथ लील गया है।ऐसे मे भी यदि निरंतर जनसंख्या वृद्धि होती रही तो जो घर थोड़ा बहुत चल पा रहा है वो भी असंभव सा प्रतीत होने लगेगा ।ऐसे मे हमारे उच्च पदाधिकारी द्वारा पारित किया गया नई संशोधित नियमावली जनसंख्या वृद्धि पे नियंत्रण के लिये बहुत ही सार्थक है।हमारे उच्च अधिकारियों द्वारा बनाऐ नियम देश और देश की जनता के हित मे ही है।अब बस अपना हित समझने की जिसे जरूरत है वो है हमारी जनता जिसे खुद नियमों को आदर दे अपने जीवध मे अमल करना है और देश मे जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण मे सहयोग दे।और देश से आर्थिक स्थिति को सुधारने बेरोजगारी को मिटाने मे अपना सहयोग देना चाहिये।

वीना आडवानी"तन्वी"

नागपुर, महाराष्ट्र