॥ तुम इन्सान हो ॥

पहले तुम इन्सान हो

लिये मानवता का वरदान हो

दया धर्म तेरा है गुण

बरबादी का तुम पथ ना चुन


पहले तुम इन्सान हो

लिये इन्सानियत का वरदान हो

हर जीवों पर तुँ प्यार लुटाना

प्यार से उनको गले लगाना


पहले तुम इन्सान हो

लिये विवेक का वरदान हो

सोंच समझकर कदम बढ़ाना

दिल किसी का कभी ना दुखाना


पहले तुम इन्सान हो

पड़ोसी के लिये वरदान हो

आस पड़ोस को अपना समझना

ना किसी से कभी झगड़ना


पहले तुम इन्सान हो

मजबूर के लिये वरदान हाे

छोटा समझकर मत ठुकराना

जीवन में बद्दुआ कभी ना लेना


पहले तुम इन्सान हो

सज्जनता की पहचान हो

सोंच समझ कर वचन तुम कहना

अपशब्द का उपयोग ना करना


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार