"होते होंगे लोग परेशान, पर हमें क्या"

आज हमारी मानसिकता ये है कि जब तक हमें दो वक्त की रोटी और जीवन जरूरत की चीजें उपलब्ध हो जाती है तो समाज में ओरों की ज़िंदगी कैसे कट रही है उससे हमें क्या सरोकार। आज कोरोना और लाॅक डाउन की वजह से कई लोगों के सर से माँ बाप का साया छीन गया, कई लोगों की नौकरी चली गई, कई बच्चों की पढ़ाई छूट गई कितनी संघर्ष रत ज़िंदगी जी रहे है लोग। 

आज मुझे ऐसी ही एक परेशान लड़की का ईमेल आया जो सबके साथ साझा कर रही हूँ, और साथ ही सरकार से अपील है की और किसी भी मुद्दे से ज़्यादा जरूरी है इस वक्त लोगों को गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी से उपर उठाया जाए। मुझे नहीं पता इसमें कितनी सच्चाई है पर अगर सच है तो सरकार का फ़र्ज़ है कि ऐसे लोगों की परेशानी सुनकर उचित न्याय दिया जाए।

ये ईमेल कुछ इस तरह है,

पढ़ाई पूरी करूँ या माँ को इंसाफ़ दिलाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाती रहूँ?

नमस्कार Bhavna Thaker,

मेरा नाम अनंता है, मैं 21 साल की हूँ और दिल्ली से आती हूँ। अगले महीने मेरी परीक्षाएं हैं पर मुझे उसकी उतनी चिंता नहीं। मुझे चिंता है उस परीक्षा की जो सिस्टम मुझसे 2 महीने से ले रहा है।

कोरोना में मैंने अपनी माँ को खो दिया। वो दिल्ली के एक गवर्नमेंट एडेड स्कूल में टीचर थीं। मैं माँ और उनके जैसे शहीद टीचरों के परिवार को मुआवज़ा दिलाने के लिए संघर्ष कर रही हूँ।

कभी इस दफ्तर जाती हूँ तो कभी उस दफ्तर। कई बार अधिकारियों को लिखित लेटर दिए पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। कॉलेज वाली परीक्षा तो मैं पढ़कर पास कर लूँगी पर इस परीक्षा में पास होने के लिए मुझे आपका साथ चाहिए, Bhavna Thaker।

मेरा साथ दें,

कोरोना काल में भी माँ को जब-जब स्कूल बुलाया गया वो अपनी जान जोखिम में डालकर गईं। अब बताया जा रहा है कि मुआवज़ा केवल उन शिक्षको के लिए है जो ‘कोविड ड्यूटी’ पर मारे गए। शिक्षा से बच्चों का भविष्य संवारना ड्यूटी नहीं होती?

मैंने Change.org/Hindi पर पेटीशन शुरू कर के दिल्ली सरकार से कोरोना में जान गंवाने वाले गवर्नमेंट एडेड स्कूल के टीचरों के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। कृपया मेरी पेटीशन साइन और शेयर करें ताकि हमारे साथ न्याय हो।

मैंने कई टीचरों के परिवार से संपर्क कर उनकी तकलीफ़ सुनी है। कुछ आर्थिक संकट से गुज़र रहे, कुछ टीचरों के बच्चे तो अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हैं। Bhavna Thaker, आशा करती हूँ आप इन बच्चों की आवाज़ ज़रूर बनेंगे।

आपका दिल से धन्यवाद करती हूँ,

अनंता शर्मा

जो इन सारी परिस्थितियों का सामना कर रहे होते है वही जानते है कि क्या बितती है। देश को बूलेट ट्रेन की नहीं रोजगार और रोटी की जरूरत है। माना की इस वक्त देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, पर जो खर्चे चुनाव पर रेल्वे स्टेशन पर 5 स्टार होटल और एक्वेरियम बनाने से लेकर शहरी करण और विकास पर हो रहे है वो फ़िलहाल लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए किया जाए तो कई लोगों की ज़िंदगी संवर सकती है। कई लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सकती है। हर कुदरती आफ़त पर मरने वालों के परिवार को सरकार की ओर से सहाय पैकेज मंज़ूर होता ही है, तो कोरोना की वजह से जिन परिवारों ने कमाने वाले अभिभावकों को खो दिया है उन सारे परिवारों को जरूरत के हिसाब से सहाय मिलनी चाहिए। और सरकारी कर्मचारियों को अपना फ़र्ज़ समझकर सारी कार्यवाही में सहयोग देकर सहायता करनी चाहिए।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु