भारत में समस्याओं के various, variant हैं

कोरोना वाइरस है या कोई बहुरूपिया है।कोरोना ने अब एक नया रूप ले लिया है।कोरोना को नया रूप लेना था,तो क्या भारत में ही लेना था?इस वाइरस की सबसे बड़ी विशेषता है कि, यह गुप्त शत्रु की तरह अदृश्य है।कोरोना के इस नए रूप को भारत में ही प्रकट होना था?

इस korona virus Variant ने अंतर्देशीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है।

इस पर घोर आपत्ति तो यह है कि, कोरोना वाइरस के इस नए रूप को Indian Variant कहने का किसी ने भी साहस कैसे किया?

Variant(प्रकार) शब्द Varity से बना है।viarity का मतलब विविधता होता है।

बहरहाल variant शब्द न सिर्फ अंतर्देशीय स्तर पर विवाद का सबब बना बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह विदेशनीति के साथ कूटनीति को भी विवादित कर रहा है।

भारत महामारी के प्रकोप के साथ  various समस्याओं के variant से जूझ रहा है।भारत में समस्याओं की various varity हैं।

समस्याएं हो या महामारी हमें डरना नहीं है, लड़ना है।कब तक लड़ते रहना है,यह कहना मुश्किल नहीं,नामुमकिन है।

वर्तमान सत्ता तो सबका विकास चाहती है,सबका विश्वास हासिल करना है।इसीलिए सबका साथ चाहिए।

वर्तमान सत्ता को जनता ने बहुत ही उम्मीद लगाकर सत्ता में बैठाया है।जनता का मनोबल बढ़ाने के लिए वर्तमान सत्ता देश की जनता को धैर्यशील और मजबूत बनाना चाहती है।

इसीलिये जनता को *आटे दाल का भाव मालूम हो* इस कहावत को व्यावहारिक उदाहरण सहित समझने के लिए महंगाई पर नियंत्रण नहीं कर रही है।सत्ता के कार्यशैली का यह एक Variant (प्रकार) है।

तेल देखो तेल को धार देखों इस लोकोक्ति को चरितार्थ करनें के लिए सभी तरह के तेल के भाव अनियंत्रित कर रखें हैं।यह सारी समस्याओं के बाद भी धैर्यशील जनता मूक दर्शक बन धैर्य रखें हुए है।

वर्तमान सत्ता कोई ऐसी वैसी सत्ता नहीं है जनता को अच्छे दिनों का प्रत्यक्ष दर्शन करवाने वाली सत्ता हैं।रामजी के मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया में बहुत अवरोध थे,वह सारे दूर कर दिए हैं। रामजी का मंदिर बनते ही देश की सारी समस्याएं चुटकी बजाते ही  हल हो जाएंगी।यह आस्था का विषय है।

देश की आर्थिक स्थिति में निरंतर वृद्धि हो रही है।पचास और साठ के दशक में गिनते के सरमायेदार थे।तात्कालिक स्थिति में 

सरमायेदारों गिनती ऐसे होती थी First twenty आर्थत देश के पूंजीपतियों में अरबपतियों की गिनती में पहले बीस गिने जातें थे।समयानुसार परिवर्तन होता गया।सरमायेदारों की फेरहिस्त निरंतर बढ़ते जा रही है।वर्तमान में Frist twenty वाला मुद्दा गौण गया है।अब तो Four twenty variant लोग भी गर्व के साथ सरमायेदारों की सूची में शरीक ही  गएं है।

वर्तमान सत्ता की कार्यप्रणाली में एक विशेष variant है।यह कार्यप्रणाली  various type के भ्रष्ट्राचार के आरोपो में लिप्त लोगों को भी पाक साफ कर देती है।भ्रष्ट्र लोगों से गलबहियां करने के पीछे गांधीजी के सूक्ति को व्यावहारिक जामा पहनाने का कार्य सम्पन्न किया जाता है।गांधीजी ने कहा है *पाप से घृणा करो पापी से नहीं।*

इसी कार्यशैली से प्रभावित होकर महाराज ने युवराज का साथ छोड़ दिया और महाराज नर देश धारी इन्द्र के दरबार में अपने दो दर्जन हलकरो के साथ शरणागत हो गए हैं।राजनीतिक गलियारों में ऐसे सुगबुगाहट है कि माहारज को जो गाजर दिखाई थी, असली थी। और जो हाथों में थमाई वह प्लास्टिक की ही निकली,प्लास्टिक को प्रदूषण फैलाने वाला तत्व माना है।

अपने देश की विधयिका में एक उच्च सदन है जिसे राज्यसभा कहतें है।इस सदन की सदस्यता को निपुण राजनेता गाजर की तरह लटकाकर रखतें है।यह गाजर उसी के नसीब में होता है जो इस गाजर की ललक रखता है।कहतें है न कुछ पाने को कुछ खोना पड़ता है।राजनीति की नए variant में कुछ खोना नहीं बहुत कुछ दाव पर लगाना पड़ता है।यह गाजर जिसके नसीब में होता है उसपर लगे चरित्र पतन के आरोप तक धूल जातें हैं।

मुद्दा है भारत पर indian variant का आरोप लगा है।यह सिर्फ निंदनीय ही नहीं है अपमान जनक भी है।इसकी घोर निदा की जानी चाहिए।


शशिकांत गुप्ते इंदौर