कोविड से हुई मौत पर मुआवजा देने की याचिका पर SC ने फैसला रखा सुरक्षित

नई दिल्ली: कोविड  से हुई मौत पर चार लाख रुपये मुआवजा देने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा. सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से मरने वाले पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के मामले में केंद्र सरकार व पक्षकारों को 3 दिनों के भीतर लिखित दलीलें देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई नहीं कह सकता कि COVID-19 आपदा नहीं है. जस्टिस एम आर शाह ने कहा- हर आपदा का अलग प्रभाव होता है.  कोई बड़ी महामारी या छोटी महामारी हो सकती है. यदि व्यक्ति अधिक प्रभावित होते हैं और महामारी की गंभीरता अधिक होती है तो आप छोटी महामारी के लिए लागू होने वाले मानदंड की मांग नहीं कर सकते. कोरोना ग्लोबल महामारी है.

क्या आर्थिक तंगी संवैधानिक दायित्व को रोक सकती है ?

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि कानून के अनुसार केंद्र को एक योजना बनानी होगी. क्या आर्थिक तंगी संवैधानिक दायित्व को रोक सकती है ? यह बाधा संवैधानिक दायित्व को पूरा करने में आड़े नहीं आ सकती. सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले हैं कि आर्थिक तंगी राहत ना देने का आधार नहीं हो सकती. केवल नियमित डॉक्टर ही बीमा कवर के दायरे में है. पैरामेडिकल स्टॉफ का क्या होगा. डीएमए की धारा 12 में  जीवन के नुकसान आदि के लिए अनुग्रह राशि का प्रावधान है. आपदाओं को धारा 2 (D) के तहत परिभाषित किया गया है. सरकार खुद कह चुकी है कि कोविड राष्ट्रीय आपदा है. चक्रवात, बाढ़ आवर्ती घटनाएं हैं. दूसरे याचिकाकर्ता ने कहा कि डॉक्टरों के अलावा भी फ्रंटवर्कर हैं. पुलिस बल, श्मशान में काम करने वाले लोग भी हैं, उनका कौन ध्यान रखेगा, हालांकि इस मामले में मुआवजा देने पर केंद्र सरकार ने असहमति जताई है, लेकिन कहा है कि सभी COVID मौतों को मृत्यु प्रमाणपत्रों में COVID मौतों के रूप में प्रमाणित किया जाएगा केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है.

केंद्र ने कहा कोविड के पीड़ितों को 4 लाख मुआवजा नहीं दिया जा सकता

केंद्र ने कहा है कि  COVID के पीड़ितों को 4 लाख का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है. आपदा प्रबंधन कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा केवल प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है. एक बीमारी के लिए अनुग्रह राशि देना और दूसरी के लिए इसे अस्वीकार करना अनुचित होगा. सभी COVID पीड़ितों को मुआवजे का भुगतान राज्यों के वित्तीय सामर्थ्य से बाहर है. COVID के प्रसार और प्रभाव के कारण प्राकृतिक आपदाओं के लिए मुआवजे को लागू करना उचित नहीं होगा. इसे कोरोना महामारी पर लागू नहीं किया जा सकता है. केंद्र और राज्य पहले ही टैक्स राजस्व में कमी और स्वास्थ्य खर्च में वृद्धि के कारण गंभीर वित्तीय दबाव में हैं. अनुग्रह राशि देने के लिए संसाधनों का उपयोग महामारी के खिलाफ कार्यवाही और स्वास्थ्य व्यय को प्रभावित कर सकता है. ये अच्छा करने की बजाए  नुकसान का कारण बन सकता है. महामारी के कारण 3,85,000 से अधिक मौतें हुई हैं जिनके और भी बढ़ने की संभावना है. केंद्र ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले ही कहते हैं कि  नीतिगत मामलों को कार्यपालिका पर छोड़ देना चाहिए और अदालत कार्यपालिका की ओर से निर्णय नहीं ले सकती.

COVID पीड़ितों के लिए डेथ सर्टिफिकेट

कोविड पीड़ितों के लिए डेथ सर्टिफिकेट पर केंद्र ने कहा है कि  सभी मौतों के मृत्यु प्रमाणपत्रों में कोविड मौतों के रूप में प्रमाणित किया जाएगा.कोविड मौतों को प्रमाणित करने में विफल रहने पर प्रमाणित करने वाले डॉक्टरों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. केंद्र का हलफनामा  कोविड पीड़ितों को 4 लाख और कोविड मौतों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के दिशा-निर्देश मांगने वाली याचिका पर दाखिल किया गया है.  

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 मई  को कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को चार लाख रुपये अनुग्रह राशि दिए जाने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की थी.  इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस  जारी कर जवाब मांगा था. दरअसल, कोर्ट ने कोविड-19 से मरने वालों के डेथ सर्टिफिकेट जारी करने के लिए समान नीति की मांग वाली याचिका पर सरकार से सवाल किया  कि क्या कोरोना से पीड़ित लोगों के लिए कोई एक समान पॉलिसी है?

 सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एमआर शाह की  पीठ ने केंद्र को कोविड-19 से मरने वाले लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.  पीठ ने कहा कि इसके लिए समान नीति अपनाई जाए. शीर्ष अदालत दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. इन याचिकाओं में केंद्र और राज्यों को साल 2005 के आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को चार लाख रुपये अनुग्रह राशि देने और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए समान नीति अपनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. पीठ ने कहा कि जब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए एक समान नीति नहीं होगी, जिसमें कहा गया हो कि मृत्यु का कारण कोविड था, तब तक मृतक के परिवार वाले किसी भी योजना के तहत, अगर ऐसी कोई है, मुआवजे का दावा नहीं कर पाएंगे. पीठ ने केंद्र को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया था.