#Chancha_BHU की वाल से साभार ।

आज लालू यादव का जन्मदिन है । लिखने के लिए बहुत कुछ है, पर लिख नहीं पा रहा हूँ ।   सियासत में उभरी गलीज और जलील सोच से किसी को जीते जी कैसे मारा जाता है ? और वो भी जम्हूरी निजाम में ? तो लालू का नाम आएगा ।  गुजरात का पहला मॉडल सोमनाथ से रथ पर सवाल होकर समूचे भारत में नफरत फैलाते हुए घूम रहा था । यह रथ जब बिहार पहुंचा तो लालू प्रसाद यादव ने उस रथ को रोक दिया और रथी  LK आडवाणी को नजरबंद कर दिया ।  यहां से शुरू होता है चारा घोटाले का खेल ।  तुर्रा यह कि चारा घोटाला शुरू हुआ तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के कार्यकाल में ।  लालू के जमाने में इस घपले को पुलिस में दर्ज कराया गया ।  लेकिन सरकार पलटी और LK केन्द्र में गृहमंत्री बन गए ।  मीडिया,  अदालत और हवेली में बैठे हुक्मरानों के निशाने पर आए लालू  प्रसाद यादव ।  दिलचस्प बात देखिये जिसने चारा घोटाला शुरू कराया वह जेल के बाहर आजाद नागरिक ही नहीं तरह-तरह के अलंकरणों से नवाजा भी जा रहा है और लालू साम्प्रदायिकता के खिलाफ खड़े होने की सजा भुगत रहे हैं । 

    बिहार चुनाव के समय जब हमारे मित्र भाई हरिवंश जी (आजकल राज्यसभा के उपसभापति हैं) प्रभात खबर के संपादक थे हम एक कालम लिखते थे 'चिखुरी' । 

चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने मीसा भारती (लालू की बेटी)  के बारे में निहायत ही अभद्र टिप्पणी की थी उस पर हमने लम्बा प्रतिवाद किया ।  मीसा का नाम ही जेपी आंदोलन की पूर्णाहुति यानी मीसा के तहत जेल यात्रा के नाम पर रखा गया है ।  जब लालू जेल में थे तब मीसा का जन्म हुआ तो मीसा से हम लोंगो का रागात्मक लगाव होना स्वाभाविक है ।  उस समय भी हमने बड़े दुखी मन से लालू का जन्मदिन मनाए थे । आज फिर आज के थके लालू को देखा तो मन उचाट हो गया । इसलिए हमने लालू की पुरानी तस्वीर ही लगाया । 

जन्मदिन की बधाई,  लालू भाई !