वट सावित्री

यूं तो जीवन में व्रत- त्योहार आते अनेक हैं 

एक ऐसा भी त्योहार जिसमें झलके पति- प्यार ।

ज्येष्ट -माह की कृष्ण अमावस्या को हर  सुहागन 

 रखती ये व्रत  , करती हर कोई सोलह सिंगार ।


चुड़ी - बिंदी , मेंहदी , महावर और मांग - टीका 

सज-धज कर यम से मांगे पति की उम्र और प्यार ।

बरगद की पूजा करके , सावित्री- सत्यवान को पूजे

3,5,से लेकर 108 परिक्रमा , जोड़े हाथ बार-बार ।


रोली, मौली, धूप-दीप, जल, सिंदूर, चना , नारियल 

बांस पंखी , कच्चा सूत,लाल कपड़ा, फूल ,फल चार ।

गुलगुले , खीर, पूरी ,हलवा बना कर  पूजे बरगद जो

सदा सुहागन रहे वो नारी ,पाए वर्ष हज़ार पति का प्यार ।


प्रेम बजाज