पर्यावरण वो अमानत है

पर्यावरण वो अमानत है,

चलती साँसें जिसके बदौलत है।

प्राणवायु देती है हमें,

विटप लताएँ घने घने,

तापमान को करती है नियंत्रित,

वर्षा को करती है आमंत्रित।

मीठे ताज़े फल और सब्जियां,

पर्यावरण से जुड़ी हमारी दुनियां।

पेड़ों पर बना के नीड़,

पक्षी करते जीवन व्यतीत।

आश्रय देती है यह सबको,

मनुज न समझा इसके मूल्य को।

काटता गया जंगल घने,

निज स्वार्थ से सयाने बने।

किया प्रकृति पर अत्याचार,

अब भुगत रहा है व्यभिचार।

पर्यावरण है अमूल्य धरोहर,

कर्ज़ इसका है सभी पर,

हे मानव!फ़र्ज़ तुम अपना निभा लो,

चाहते हो अस्तित्व तो,पर्यावरण बचा लो।

 रीमा सिन्हा (लखनऊ)