किराये का घर

ये जो रहते हम जहां ,है वो किराये का घर

छोड़ना है तुझे इक दिन,फिर काहे का डर


आते यहां अभिनय करने,बीताते कुछ पल

आता है बुलावा ,कूच करते हैं हो के निडर


जब तक है जिंदगानी,लिख अपनी कहानी

अनायासआ जाए तुफां,और तू होजा बेघर


बांध ले गांठ ऐ बंदे ,आया है तो जाएगा ही

खुशहाल होकर तय कर,जिंदगी का सफर


जाना छाप छोड़कर ,कि याद  करे आवाम

था इक मरदूद धरा पर,काम कुछ ऐसा कर


इसे करिश्मा कहूं कुदरत का या कुछ और

'राजेंद्र'हैआज हरा-भरा,कल सूखेगा शजर


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सम्पर्क सूत्र.......

राजेन्द्र कुमार सिंह

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