"उपभोक्ता की समस्या"

वर्तमान परिवेश में सब कर रहे तपस्या।

एक तो महामारी दूजा उपभोक्ता की समस्या।।


सरकार देती रहती आय दिन आश्वासन।

बिना रोजगार कैसे चले घर का राशन।।


सेठ और बनिए कर लेते हैं खूब जमाखोरी।

और मौका पाकर बेचते हैं चोरी-चोरी।।


दीन-हीन भला कहां से जुटा पाए पैसे।

रोजगार रहा नहीं अब मजदूरी मिले कैसे।।


स्वस्थ रहने के लिए खाना जरूरी है हर दिन।

पेट के खातिर गुल्लक के पैसे भी लेते गिन।।


आसमान छूने लगा हर एक चीज का दाम।

अब तो कोरोना की बात हो गयी है आम।।


स्वार्थ में पड़कर सब कर रहे कालाबाजारी।

आज हर राशन में देखो मिलावट है भारी।।


विज्ञापन देख लोग आकर्षित हो खरीदने लगते हैं।

पर गुणवत्ता में कमी देख पछताने लगते हैं।।


एक वस्तु की कई किस्म और कीमत होती है।

लेकिन मिलावट देखो हर किस्म में होती है।।


खराब किस्म मिलने पर भी शिकायत नहीं करते हैं।

ना चाहते हुए भी ग्राहक पूरा बिल भरते हैं।।


उपभोक्ता अधिकार नियम को जानना है जरूरी।

तभी सही उत्पाद पाने की कामना होगी पूरी।।


-द्रौपदी साहू

छुरीकला, कोरबा, छत्तीसगढ़

शिक्षिका - जय भारत इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल कटघोरा, जिला-कोरबा