आजाओ न होली ,,,,,,,,

युग न्यूज़ नेटवर्क

आई फ़ागुन में,,,,,

.ढोल बजते और 

मृदंग गूंजते , 

मकरंद की आवाज़ , 

लोग थिरकते , 

रंगों की बौछार,

महुआ महका ,

आमों में , मोर लगें हैं , 

आओ तुम भी 

फ़ागुन में , और होली में,

अंतर्मनको  मेरे 

महका जाओ ,

तनिक तो मुझको

छूट जाओ न,

प्रेम जगा दो , ह्रदय की 

वीणा पर , 

मधुर तान तुम्हारी , 

भली भली सी प्यारी , 

हाँ जी फ़ागुन में , 

आपस में हम मिल जुल 

जाएं हंस , मुख सा तुम वेश , 

बनाओ , होली आई , 

तुम भी आओ 

आजाओ न फ़ागुन में , 

बांसुरियां गीत सुनाती

घुंगरू की आवाजें आतीं ,

पलाश से बनता रिश्ता ,

मन भावन , सा प्रिये 

अपना आजाओ 

न फ़ागुन में , 

आजाओ न होली ,,,,,,,,

आई फ़ागुन में

डॉ. मुश्ताक़ अहनद शाह

सहज़।  हरदा

मध्यप्रदेश,,