बिना परीक्षा के उतीर्ण परीक्षा फल

महामारी में एक तरफ जहां सब पर मार पड़ी चाहे वो आपातकालीन सुविधाएं हों, रोज़गार, आमदनी आदि इन सभी से सब से अधिक प्रभावित हुई शिक्षा और बच्चों का कैरियर। करीबन साल भर से ऊपर हो गया है बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं लेते हुए चाहे वो स्कूल से हो या टयूशन से और इस का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है दसवीं, बारहवीं और साथ ही ग्यारहवीं के छात्रों पर। दसवीं और बारहवीं के छात्रों पर तनाव और दबाव बना रहा बोर्ड की परीक्षा का और ग्यारहवीं के छात्र जो दसवीं के बाद नए विषयों का चयन किया पर ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से ही पढ़ाई हुई साथ पेपर और नतीजा भी और अब बारहवीं की पढ़ाई भी ऑनलाइन ही न जाने कैसी होगी इन की बोर्ड परीक्षा। 

जिन बच्चों ने दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा देनी थी पहले तो लटकते ही रहे महीनों तक फिर दसवीं का फैसला आया परीक्षा नहीं होगी और छात्रों को अगली कक्षा में प्रोमोट कर दिया जाएगा। फिर अनिश्चितता की धूरी पर रहे बारहवीं के छात्र कभी कोई तारीख तो कभी कोई और दो दिन पहले प्रधानमंत्री जी ने बारहवीं की परीक्षा रद्द कर दीं।

 माना हालात बेहद ही गंभीर और कठिन रहे मार्च 2020 से पर सबसे ज़्यादा मुश्किल रहा छात्रों के लिए जिन्हें दसवीं के बाद नए विषयों का चुनाव करना होता है साथ ही बारहवीं जिन्हें कॉलेज या अन्य कोर्स में दाखिला लेना होता है। इस तरह सभी का भविष्य दाव पर लग गया।

  ऊपर से जो ये व्यवस्था हुई इस का असर भी छात्रों पर रहा क्योंकि *बिना परीक्षा के उतीर्ण होना तो ऐसा रहा बिन तैरे ही पार हो जाना* जिसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस में वो भी सफल रहा जिसने अधिक मेहनत की और वो भी जिसने नहीं। साथ ही मेधावी, मध्यम, कमज़ोर सभी समान। ऐसे में जितनी निराशाजनक स्थिती स्कूल न जा पाने और ऑनलाइन शिक्षा पर रही उस से परीक्षा न हो पाने के कारण सही नतीजों पर। निश्चित रुप से ये बेहद ही मायूस भरा दौर रहा छात्रों के लिए और उनके अभिभावकों के लिये भी।

.....मीनाक्षी सुकुमारन

       नोएडा