कोरोना से ठीक होने के बाद नया खतरा, अब लोगों में फैल रहा एस्परजिलोसिस फंगल

कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां पहले कोरोना रिकवरी के बाद लोगों में ब्लैक फंगस की समस्या देखने को मिल रही थी वहीं अब एस्परजिलोसिस फंगल इंफेक्शन सामने आया है। एक्सपर्ट की मानें तो ब्लैक, व्हाइट व यैलो की तरह यह फंगस भी हवा में मौजूद रहता है।

क्या है एस्परजिलोसिस?

एस्परजिलस नामक कवक से होने वाला यह इंफेक्शन वातावरण में हमेशा मौजूद रहता है। सीसडी के मुताबिक, ज्यादातर लोग एस्परजिलस बीजाणुओं को सांस के जरिए शरीर में ले लेते हैं लेकिन उससे बीमार नहीं पड़ते। इसके कारण एलर्जिक रिएक्शन, फेफड़ों और शरीर के अन्य अंगों में इंफेक्शन हो सकता है।

किन लोगों को अधिक खतरा?

सीडीसी के मुताबिक, यह फंगल इन्फेक्शन कमजोर इम्युन सिस्टम और जिन्हें फेफड़ों की बीमारी हो उन्हें जल्दी अपना शिकार बनाता है। पिछले दिनों गुजरात, वडोदरा, लुधियाना में एस्परजिलोसिस इंफेक्शन के मामले देखने को मिल रहे हैं। यह नया फंगल इंफेक्शन कोरोना से ठीक हुए मरीजों में देखने को मिल रहा है, जिसका एक कारण हाई डोज स्टेरॉयड भी है।

एस्परजिलोसिस के लक्षण

-एलर्जी ब्रोन्कोपल्मोनरी एस्परजिलोसिस के लक्षण काफी हद तक अस्थमा के समान ही होते हैं जैसे - बुखार, सांस फूलना, सांस लेते समय घरघराहट व खांसी

-एलर्जिक एस्परजिल साइनसिटिस में बहती नाक, सिरदर्द, घुटन महसूस होना और सूंघने की क्षमता कम होना

-क्रोनिक पल्मोनरी एस्परजिलोसिस में खांसी, वजन घटना, थकान, सांस लेने में दिक्कत, खांसी के साथ खून आना।

-एस्परजिलोमा में खांसते समय खून आना, खांसी, सांस लेने में कठिनाई

-इनवेजिव एस्परजिलोसिस में सांस लेने में परेशानी, बुखार, खांसी, छाती में दर्द, खांसते समय खून आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

एस्परजिलोसिस से कैसे बचें?

-प्रदूषण से बचने के लिए घर से बाहर जाते समय एन95-मास्क जरूर पहनें। साथ ही घर में एयर प्यूरीफाई लगाएं।

-धूल-मिट्टी या ज्यादा प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचें।

-ऐसा कामना करें, जिनमें धूल-मिट्टी अधिक हो जैसे बागवानी आदि।

-स्किन इंफेक्शन से बचने के लिए दिन में कम से कम 2-3 बार फेसवॉश करें। हाथों को बार-बार सैनेंटाइज करें या धोते रहें।

-इसके अलावा डॉक्टर इसके इलाज के लिए एंटी-फंगल दवाएं दे रहे हैं।