प्रणाम!

हे महाप्राण ! स्वीकार करो मेरा   प्रणाम! 

सहज आनंद ,तुम प्रखर ज्योति, 

अन्नदाता के महाप्राण ।

दर्शन मात्र से धन्य हुए सब,

 हे दीन हीन के कृपा निधान! हे महाप्राण! स्वीकार करो मेरा  प्रणाम! 

मेरा प्रणाम।-----

कृषक हितैषी बनकर तुमने, नव-पथ का निर्माण किया।

 क्रूर काल के बंधन में बंध ,

जग से आज प्रयाण किया।।

  अब थकान सब दूर करो,  

चिर निद्रा में कर विश्राम।।

 हे महाप्राण ! स्वीकार करो मेरा प्रणाम!

मेरा प्रणाम।-----

 हे महाशक्ति के महा उपासक,

 शिवभक्त रुद्रावतार।

 शोषित समाज के अग्रदूत,

 नमन तुम्हें है सौ सौ बार।। 

चरणों में कविता छंद समर्पित,

 सरस हृदय में रखकर ध्यान, 

हे महाप्राण! स्वीकार करो मेरा प्रणाम!

मेरा प्रणाम।

गौरीशंकर पाण्डेय सरस