मेरे पापा

जब भी फ़ोन पर व्यथा सुनाऊँ,

तुरत आप को खड़ा मैं पाऊं।

मेरे पापा सब से न्यारे हैं

इस जग के वे उजियारे है।

पल पल की खबर वे लेते ,

सारा दुख मेरा हर लेते ।

सुख दुख के है मेरे साथी,

फिर काहे मैं रहूँ उदासी ।

मेरे ज़हन में मैं अग्नि सी, 

तुम्हारी नज़र में मैं  कुंदन सी ।

मैं चाहूँ कुछ कर दिखलाऊँ,

ऐसा प्यार हर पल पाऊँ।

मेरे पापा सबसे अच्छे,

मेरे पापा बहुत है सच्चे।

            

मंजरी

 डॉ अमृता पटेल

2/ C-9, वृन्दावन कालोनी,

लखनऊ