पेट दर्द को न करें अनदेखा, हो सकती है ये गंभीर बीमारी

पेट दर्द को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, लोकिन आगे चलकर यह घातक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसारकृ पेट में दर्द होना कई गंभीर बीमारियों का संकेत होता है, जिनमें एक है पेट का अल्सर। वैसे अल्सर के कई प्रकार  हैं। आज हम आपको पेप्टिक अल्सर के बारे में बताएंगे। अध्ययन के मुताबिक पेप्टिक अल्सर दुनिया की आबादी के करीब 4% में मौजूद हैं। 2015 में  दुनिया भर में 87.4 मिलियन लोगों में नए अल्सर पाए गए थे।

कैसे होता है पेप्टिक अल्सर

पेप्टिक अल्सर के बारे में जानने से पहले अल्सर के बारे में जानना जरूरी है। यह एक प्रकार का घाव होता है, जो पेट, आहारनाल और आंतों की अंदरूनी सतह पर विकसित होता। पेप्टिक अल्सर पेट और छोटी आंत दोनों को प्रभावित करते हैं। एच पाइलोरी नाम के बैक्टीरिया के कारण पेट के अंदर छाले और घाव होने लगते हैं। इसके अलावा यह तब होता है जब खाना पचाने वाला एसिड पेट की दीवारों और छोटी आंत को नुकसान पहुंचाने लगता है। सही समय पर इसका इलाज न कराने पर कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है।

कारण

इसका कारण अनियमित जीवनशैली, खानपान में लपरवाही, अत्यधिक धूम्रपान-शराब, फास्टफूड का सेवन, ज्यादा वजन, खाने में तेल-घी और मसाले की ज्यादा मात्रा और मानसिक तनाव है।

लक्ष्ण

-भूख न लगना, पेट में जलन और सूजन

 -पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द रहना

 -मोशन के साथ ब्लीडिंग

 -गैस और खट्टी डकार

 -सुबह-सुबह हल्की मितली

 -एनीमिया यानी कम हीमोग्लोबिन (खून की कमी) 

उपचार

जालंधर के एसजीएल अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. दिशा स्याल ने बताया कि इसका उपचार अल्सर की गंभीरता और मरीज की स्थिति पर डिपेंड करता है। आम तौर पर इसका इलाज आहार एवं जीवनशैली में परिवर्तन, दवाइयां और एंडोस्कोपी तकनीक से ऑपरेशन कर किया जाता है। एनीमिया यानी कम हीमोग्लोबिन वाले कई मरीजों में खून का मल टेस्ट पॉजिटिव आता है। उन्हें फ्रैंक ब्लीडिंग नहीं होती है। इसलिए कम हीमोग्लोबिन वाले रोगियों को पेप्टिक अल्सर से बचने के लिए एंडोस्कोपी करवानी चाहिए। 

जरूर करें ये काम

-खाली पेट न रहें, नाश्ते में केला और सेब शामिल करें

-हर 3-4 घंटे में बार-बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करें

-भरपूर पानी पिएं और दही का नियमित सेवन करें

-आहार में फल, हरी सब्जियां और मेवे को शामिल करें

-मोटापा और एसिड रिफ्लक्स से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें

-बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दर्द निवारक दवाओं के इस्तेमाल से बचें

-जंक फूड और मसालोंसे बचें

 - भोजन के बाद नियमित टहलें। रात का खाना जल्दी खाएं।

posted by -दीपिका पाठक