आदमी के गीत

निर्दलीय प्रकाशन की पुस्तक "आदमी के गीत"  जो कि काव्य सृजन,निबंध लेखन,सर्वोदय,दृष्टि जन संगठन, अंतरदेशीय मित्र संघ एवं सर्वास के माध्यम से समाज कार्य को करने वाले निर्दलीय समूह के संस्थापक संपादक श्री कैलाश आदमी द्वारा लिखित यह पुस्तक मुझे आदरणीय श्री कैलाश आदमी द्वारा स्वयं ही अपने कर कमलों के माध्यम से सस्नेह उपहार स्वरूप मेरे आवास पर एक शिष्टाचार मुलाकात के दौरान प्रदान करी थी।स्वभाव से अति विनम्र,मृदुभाषी,साहित्य की विभिन्न विधाओं में माहिर, हमेशा सभी की सहायता के लिए तत्पर, गांधीवादी विचारधारा से ओतप्रोत,विधि स्नातक,आर्युवेद रत्न मेरे सबसे पसंदीदा निर्दलीय समाचार पत्र के संस्थापक संपादक का आभार व्यक्त करना चाहती हूं ।जिन्होंने मुझे यह पुस्तक "आदमी के गीत " भेंट स्वरूप प्रदान करी। कुल 128 पृष्ठ की पुस्तक आदमी के गीत में 111 विभिन्न विधा पर आधारित काव्य रचनाएं हैं।यह एक ऐसी कविताओं का गुलदस्ता हैं जिसमें हरेक कविता की अपनी एक अलग ही पुष्प के समान गरिमापूर्ण सुगंध है।यह एक ऐसी किताब है जिसे आप पन्ने पलटकर यूं ही नहीं छोड़ सकते हैं। यह दिलो दिमाग में घर बनाने वाली आदमी की गीताई है। यह पुस्तक मुझे तो कविताओं का अथाह समुद्र सी लगती है। इसकी अंतिम रचना "एक प्यास मेरी भी" पाठकों की कविता की प्यास बुझाने के लिये काफी है। मुख्य पृष्ठ से लेकर अंतिम पृष्ठ तक पुस्तक बेमिसाल और लाजवाब है।जहां सरल भाषा में रचि गयी यह काव्य श्रृंखला अपनत्व का बोध कराती है वहीं व्यवस्था की कमियों को भी उजागर करती हुई दिखती है। कहीं प्रेम है तो कहीं वात्सल्य भी है। वहीं कहीं गहरे अर्थ हैं तो वहीं होली के रंग और अपने स्व को विसर्जित करता कवि,कविता में अपने पात्रों को उनके पूरे आकार में विकसित होने का कवि महोदय नें संपूर्ण अवसर दिया है। यह आदमी के गीत की गीताई है जिसमें कवि नें गांव और शहर का अद्भूत समन्वय स्थापित करा है। मौलिकता की उर्वर भूमि से विचारों की उगी हुई लहलहती फसल है आदमी के गीत। कवि लिखने से पहले हर कविता को अपने अंतस में घटित करता है ।फिर उसे अपनी लेखनी के रंग से रंगता है। आदमी के गीत की समीक्षा करना मुझ जैसे सामान्य से साहित्यकार के लिये तो जैसे सूरज को दिया दिखाने जैसा लग रहा है। फिर भी मैं अपने आपको रोक नहीं सकी। यह मेरा प्रयास है जो हमारे पाठकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगा ऐसा मेरा विश्वास है।हमेशा शांत रहने वाले और कम बोलने वाले श्री कैलाश आदमी "आदमी के गीत " में हर विषय पर खुलकर गीताई कर रहें हैं। पुस्तक पठनीय होने के साथ- साथ संग्रहणीय भी है।

श्रीमती रमा निगम

 वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल म.प्र. 

nigam.ramanigam@gmail.com