कर हस्त अंजस प्रार्थी

कर हस्त अंजस प्रार्थी,

अकीदत अंबिका तेरी आरती, 

स्वीकार कर हे भगवती, 

निष्ठा से पुजे तुझे भारती, 

कर हस्त अंजस प्रार्थी ।


है मृत्यु यू विक्राल क्यों?

हे मां, हरो तुम कल को,

हलाहल विष है हर घड़ी,

अम्बे हरो ,विपदा अडी,

कर हस्त अंजस प्रार्थी 

अकीदत अंबिका तेरी आरती l


त्राहि- त्राहि मात कह

क्यों पुत्र तेरे रो रहे,

गर्भ के तेरे शिशु मां

असमय काल में सो रहे,

संकट कोरोना का कटे,

यह दुख की अब बद्री छटे, 

यह विश्व पुकार रहा तुमको 

हे वैष्णवी ,तेरी आरती 

कर हस्त अंजस प्रार्थी 

अकीदत अंबिका तेरी आरती।।


वरिष्ठ कवयित्री अंजनी द्विवेदी शिक्षिका, स्वतंत्र लेखिका

स्तंभकार, नवीन फल मंडी, अगस्त पार, देवरिया ,उत्तर प्रदेश