गिद्ध तो बदनाम है

गिद्ध तो बदनाम है,

मुर्दों को खाने में महज,

आदमी तो आजकल,

जिंदा को भी खा जाएगा!

भूलकर इंसानियत को

जेब ऐसे भर रहा,

मौत को भी चन्द सिक्कों से 

दग़ा दे जाएगा।

हमनें देखा और सुना है 

इस जमाने में यही,

जो भी आया है जहाँ में 

एक दिन वह जाएगा।

है अचम्भा देखकर, 

यह क्यों नहीं वह मानता?

कौन रहता है हमेशा

और कभी ना जाएगा?

साथ कुछ जाता नहीं है 

बाद मरने के मगर,

आदमी अब सोंचता है 

साथ सब ले जाएगा।

या तो दुनिया के अनोखे 

सच से वह अनजान है,

या तो वह यह मानता है 

वह यहीं रह जाएगा।

वक़्त कितना बेरहम है 

क्या नहीं वह जानता?

जब मिलेंगी ठोकरें तब ही 

समझ सब आएगा।

डॉ0 श्वेता सिंह गौर,वरिष्ठ कवयित्री व 

शिक्षिका,स्वतंत्र लेखिका व स्तम्भकार

जनपद-हरदोई,उत्तर प्रदेश

दूरभाष-9455901691