जीवन है मृगतृष्णा

जीवन है मृगतृष्णा,

इसमे खो जाना नही।

ईश्वर निर्गुण सत्य है,

तुच्छ प्राणी पहचाना नही।।


श्वासों का हिसाब रख,

ईमान दुरुस्त रखना है।

सत्कर्म की किताब रख,

अधर्म नही करना है।।

धूर्तता के आटें का,

निवाला तुझे खाना नही।

जीवन है मृगतृष्णा,

इसमे खो जाना नही।।


तामसी प्रवृति का त्याग कर,

ईश्वर मे अनुराग कर।

ज्ञान चक्षु जो खोल‌ दे,

उस लौं का आगाज कर।।

चढ़ सत्य की सीढ़ी पे,

वापस तूझे आना नही।

जीवन है मृगतृष्णा,

इसमे खो जाना नही।


   चारू मित्तल

  मथुरा (उ०प्र०)