बच्चों की कल्पना को साकार करती है दीवार पत्रिका : महेश पुनेठा

बांदा। शैक्षिक संवाद मंच उ.प्र. द्वारा आयोजित दो दिवसीय दीवार पत्रिका सृजन कार्यशाला के दूसरे दिन कवि, लेखक एवं संपादक महेश चंद्र पुनेठा ने दीवार पत्रिका हेतु बच्चों से रचनाएं लिखवाने के सम्बंध में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को छोटी-छोटी रचनाएं लिखने के लिए प्रेरित करें। सृजन के लिए छह ककार (क्या, कब, कौन, क्यों, कहां, कैसे) का प्रयोग देखने, खोजने, सोचने एवं अभिव्यक्त करने हेतु आवश्यक है। प्रतिभा, अभ्यास, अध्ययन एवं कल्पना के संयोग से बेहतर लेखन सम्भव है। बच्चों की कल्पना एवं चिंतन को साकार करने हेतु दीवार पत्रिका एक सशक्त मंच है। बच्चों के भाषायी कौशलों के विकास के साथ ही यह बच्चों में सामूहिकता एवं सामाजिकता का भाव भरती है। 

शैक्षिक संवाद मंच उ.प्र. द्वारा 22 एवं 23 जून को आयोजित आनलाईन द्वि-दिवसीय दीवार पत्रिका सृजन कार्यशाला में दूसरे दिन संदर्भदाता महेशचंद्र पुनेठा (संपादक -शैक्षिक दखल, उत्तराखंड) ने प्रदेश के 40 जिलों से जुड़े शिक्षक-शिक्षिकाओं के सम्मुख व्यक्त किये। आगे कहा कि रचना में इंद्रिय बोध जितना अधिक गहरा होता है, वह रचना उतनी ही प्रभावपूर्ण एवं सम्प्रेषणीय होती है। बच्चे अपने भावों को शब्दचित्र के रूप में प्रकट करें। परिवेश में प्राप्त किसी भी वस्तु पर लिखना, संवाद करना, किसी कविता-कहानी को पूरी करना आदि गतिविधियों से बच्चों से शुरुआती लेखन करवाया जा सकता है। 

स्मरण रहे कि बच्चों को रचनाकार नहीं बनाना है, बल्कि उनमें भाषायी दक्षता विकसित करना है इसलिए उनकी रचना को उस विधा की कसौटी पर न कसें। इस्पात भारती पत्रिका के संपादक अजय प्रजापति ने भी अपने विचार साझा किये। इसके पूर्व प्रशिक्षण सत्र का आरम्भ अरविंद सिंह, वाराणसी द्वारा प्रस्तुत करेगा गीत, एक बनो नेक बनो, से हुआ। कार्यशाला के प्रथम दिवस की आख्या दीपिका गर्ग, महोबा ने पढ़ी और पायल मलिक, मुजफ्फर नगर ने आख्या को कविता रूप में ढालकर प्रस्तुत किया जिसे सभी ने सराहा। अतिथि एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए शैक्षिक संवाद मंच के संस्थापक प्रमोद दीक्षित मलय ने सभी के सहयोग, सम्बल, सहकार एवं समन्वय से आयोजित कार्यशाला में दीवार पत्रिका सृजन के तौर-तरीके सीखने-समझने के प्रति रुचि एवं ललक की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि स्कूल खुलने पर पचास से अधिक विद्यालयों से दीवार पत्रिकाएं प्रकाशित की जायेंगी।

 देश के महान शिक्षाविद् गिजुभाई बधेका की पुण्यतिथि पर सभी ने स्मरण करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मनुजा द्विवेदी, झांसी ने सत्र में प्रतिभागियों को भी अपने विचार एवं प्रश्न रखने के अवसर देते हुए सत्र को रोचक एवं ऊर्जामय बनाये रखा। आभार प्रदर्शन करते हुए डा.रेणु देवी, हापुड़ ने दो घंटे तक चले कार्यशाला-सत्र में संदर्भदाता की दीवार पत्रिका सृजन विषयक जानकारी के सहज सम्प्रेषण एवं  विभिन्न जिलों से जुड़े 60 से अधिक प्रतिभागियों के धैर्य, रूचि, जिज्ञासा, उत्साह एवं स्वानुशासन के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में दिये योगदान के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। 

कार्यशाला में कमलेश पांडेय, दीक्षा मिश्रा, आसिया फारूकी, रुखसाना बानो, ऋतु श्रीवास्तव, श्रुति त्रिपाठी,  हरियाली श्रीवास्तवा, रीता गुप्ता, विभा शुक्ला, अनीता मिश्रा, कृष्ण कुमार, दीप्ति खुराना, सुनीता गुप्ता, रीना सिंह, सीमा मिश्रा, सुषमा मलिक, प्रतिभा यादव, निकहत रशीद, बिधु सिंह, अनिल वर्मा, स्मृति चौधरी, मीना भाटिया, ममता खन्ना, नीतू शर्मा, कंचन बाला, शैला राघव, प्रतीक्षा श्रीवास्तव, प्रियंका विक्रम सिंह, रामकिशोर पांडेय, शालपर्णी अवस्थी, डा. निमिषा लाल, रश्मि राजपूत, अभिषेक सिंह, बबिता खोखर, गरिमा वार्ष्णेय, नेहा वर्मा, विभा श्रीवास्तव, डा. सुमन गुप्ता, प्रियदर्शिनी तिवारी, अजीत दिवाकर, अभिलाषा गुप्ता, डा. शालिनी गुप्ता, अनिल राजभर, अर्चना वर्मा, डा. श्रवण गुप्ता,  संत कुमार दीक्षित, राजबहादुर यादव,  मोनिका सिंह, शीलचंद्र जैन, अब्दुल रहमान, अनुराधा दोहरे, छवि अग्रवाल, सुधारानी एवं सुमन गुप्ता आदि रहे।