"हद कर दी आपने..."

इसकी टोपी उसके सर 

जनता  हुआ  दरबदर !!


पेट्रोल से डीज़ल आगे 

महंगाई तो आगे भागे !!


बेहद कर दी आपने 

ये हद कर दी आपने ।।


पहनकर राजनीतिक चोला 

एक  दूसरे का  पोल खोला !! 


अच्छे दिन का सपना दिखाकर 

गैरों  को  भी  अपना  बनाकर !!


बेहद कर दी आपने 

क्या हद कर दी आपने ।।


एक तरफ वार्ता कर रहे हैं 

दूसरी तरफ सेना मर रहे हैं !!


किसान बरसात के भरोसे 

जन मजदूर राम के भरोसे !!


बेहद कर दी आपने 

ये हद कर दी आपने ।।


नमक  रोटी  में  इतना  बाधा 

देखो ना मेरा बनियान आधा !!


एक  तरफ  कोरोना  की मार

दूसरी तरफ माफ़िया भ्रष्टाचार !!


बेहद कर दी आपने 

क्या हद कर दी आपने ।।


हमरा बेबस मजबूरी देखकर 

अनैतिक चुनावी रोटी सेंककर !!


नेता अभिनेता एक तरफ 

फिर पांच साल उनको परख !!


 बेहद कर दी आपने 

ये हद कर दी आपने ।।


स्वरचित एवं मौलिक 

मनोज शाह 'मानस' 

डी-27, सुदर्शन पार्क

नई दिल्ली-110015

मो.नं.7982510985