मन स्वच्छ-सुंदर होगा तो पर्यावरण भी सुरक्षित होगा

आज 5 जून है, विश्व पर्यावरण दिवस। हम सभी ने लॉकडाऊन में पर्यावरण के महत्व को अच्छे से जाना-समझा है। किसी भी व्यक्ति-प्राणी के जीवन में स्वच्छ हवा, प्रदूषण मुक्त शुद्ध वातावरण बहुत जरूरी है। पर्यावरण जो हमें प्रभावित करता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं, वनस्पति, प्राणी, भौतिक परिवेश, वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे, जीव-जंतु सभी का समावेश होता है। आज प्रदूषण के कारण सारी धरती दूषित हो रही है। निकट भविष्य में पर्यावरण के अत्यधिक प्रदूषण से मानव सभ्यता का अंत दिखाई दे रहा है। एक सवाल उभरता है कि हरी-भरी धरती आज क्यों जल रही है। जंगल, बगीचे सब काट दिए गए। पहाड़ खोद लिए। एक पेड़ काटने पर न केवल एक पेड़ को काटा जाता है बल्कि न जाने कितने पशु-पक्षियों का बसेरा उजाड़ा जाता है। मानव कब तक अपने दुष्कर्मों से अनजान बना रहेगा। हरी-भरी धरती को वीरान करता रहेगा। हम अपना घरेलू एवं औद्योगिक कचरा तक नदी में बहा डालते हैं। पवित्र गंगा नदी को भी शव बहाकर दूषित करते जा रहे हैं और बाद में हम ही जल ही जीवन का नारा भी लगाते हैं। 

समझने की जरूरत है कि पर्यावरण के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है। अगर हम अब भी नहीं समझे, चेतेे तो डर है कि कहीं धरती का जीवन चक्र ही समाप्त न हो जाए। हमने देखा-सुना हैं, कोविड-19 महामारी लॉकडाउन के दौरान पर्यावरण को थोड़ा फायदा पहुंचा है। आसमान साफ हो गया, हवा शुद्ध हो गई है। जागरूकता हेतु विश्व पर्यावरण दिवस 1974 से मनाया जा रहा है। स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम सांस को रोक नहीं सकते लेकिन जिस हवा में सांसें लेते हैं उसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए कुछ कर सकते हैं। आज पर्यावरण विनाश एवं विश्वव्यापी समस्या बन चुका है। मनुष्य विज्ञान और विकास के नाम पर प्रकृति का लगातार विनाश करता जा रहा है। सुंदर एवं स्वस्थ जीवन जीने के लिए पृथ्वी को नष्ट होने से बचाना होगा। जब तक लोगों में स्वाभाविक मन से सुंदरता, पर्यावरण के प्रति लगाव, हरियाली से प्रेम नहीं पैदा होगा तब तक पर्यावरण संरक्षण एक सपना ही रहेगा। ज्यादा कुछ न कर सकें तो कुछ बातों का ध्यान दें, जैसे अनावश्यक विद्युत उपकरण ना, जलाएं,  फ्रिज का दरवाजा खुला न छोड़ें। आवश्यकता अनुसार ही पानी का प्रयोग करें। घर से कपड़े का बैग लेकर चलें। पूरे घर के बल्ब हटाकर सीएफएल लगाएं। एसी का प्रयोग कम करें। कचरा ठीक उसी जगह फेंके जहां फेंकने का स्थान हो। वर्षा का जल संरक्षण करें, अन्य लोगों को भी जागरूक करें। ऊर्जा संरक्षण करें। यह दौर भी खत्म हो जाएगा हर कठिनाई कुछ राह दिखा ही देती है। कपड़े के बैग बनाकर जब मैंने एक शिक्षिका के रूप में अपने स्तर से विद्यालय की ही माता अभिभावकों को बुलाकर पुराने कपड़े से बैग बनवा कर दुकान-दुकान घर-घर वितरित किया तो एक कदम मानवता और स्वछता की ओर बढ़ता चला गया। पहले मुझ पर हंसने वाले लोग बाद में साथ आते गये। गरीब महिलाओं को रोजगार मिला दूसरी तरफ पर्यावरण सुरक्षा के लिए घर-घर बैग पहुंचे। आज भी लोगों के घरों में हमारे बनाए हुए बैग इस्तेमाल होते हैं। देखकर थोड़ी संतुष्टि मिल जाती है कि थोड़ा सा ही सही पर मैंने अपने हिस्से की जिम्मेदारी निर्वहन की है। धीरे-धीरे ही सही बदलाव होगा।

हमने अपने विद्यालय के गांव की स्वच्छता की बागडोर हमारे विद्यालय के नन्हे पर्यावरण प्रहरी जो विद्यालय की ग्रीन आर्मी के बैनर तले तन-मन से ’सांसे हो रही है कम, आओ पेड़ लगाएं हम’ का नारा लगाते हुए अपनी ग्राम सभा में कूड़े के जमाव के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं। किसी भी घर के बाहर कूड़ा नहीं इकट्ठा होने देते। विद्यालय के सामने ही कूड़े के उस डंप को जहां बड़ी सी चट्टान बन चुकी थी, साफ-सफाई करा कर आज वहाँ सब्जियां उगाई जाती हैं, जिसका लाभ पूरे ग्रामवासी उठा रहे हैं। इस किचेन गार्डेन की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी मेरे मागदर्शन में नन्हे बच्चों की टोली और माता अभिभावक निभा रहीं हैं। कहते हैं न मन को स्वच्छ बनाएं तभी पर्यावरण सुरक्षित होगा। जीवन दिखावे का नाम नहीं सादा जीवन जीने की आदत डालनी चाहिए। जीवन में धन ही सब कुछ नहीं एक दूसरे के दुख-सुख में काम आना, कठिन समय में धैर्य रखना, ईश्वर में आस्था रखना, सकारात्मक सोच होना, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना, धैर्य अपनाकर जीवन को सुरक्षित बनाया जा सकता है। आज सभी का मन अशांत है। हर व्यक्ति दुखी है, इस अशांति को शांति में बदलने, अंधकार को प्रकाश में बदलने की कला सीखनी होगी। पर्यावरण फिर से सुरक्षित हो, हर तरफ हरियाली हो, जीवन में कामयाबी हो, यह सिर्फ इस बात पर निर्भर करता है कि हम में कितनी क्षमता है। क्या हम वाकई ऐसा अपने पर्यावरण को सुरक्षित करना चाहते हैं। हमारी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम कितने आशावादी है। निराशा से भरा इंसान कभी भी जीत हासिल नहीं कर सकता। आशा की लौ जलाए रखना चाहिए। सुरंग चाहे जितनी भी लंबी क्यों न हो उसे पार कर रोशनी का संसार बेसब्री से हमारा इंतजार कर रहा है। बहुत जल्द सब कुछ पहले जैसा होगा, बस हमें अपने हिस्से का काम कर देना है। कहते हैं भरोसा अगर खुदा पर हैं तो जो लिखा है तकदीर में वही पाओगे, पर भरोसा अगर खुद पर है तो खुदा वही लिखेगा जो आप चाहोगे। अगर मन में चाहत है तो हम अपनी चाहत को पूरा करें। अपने पर्यावरण की रक्षा करें। एक बेहतर समाज का निर्माण करें। यदि हम पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखना चाहते हैं तो प्रकृति का संतुलन सुनिश्चित बनाना होगा।

जब फूल खिलेंगे क्यारी क्यारी, जब चारों दिशा में होगी हरियाली, सुंदर बन जाए घर आंगन, सजी हो धरती ले हरियाली। जब पेड़ों को हम मित्र बना लंे, मन में सुंदर चित्र सजा ले। जब पक्षी गायें धरती मुस्काये, हरियाली तब खुशहाली लाये। नदी-लताएं झरने घाटी, महक उठे जब धरती माटी। मन को सुंदर-स्वच्छ बनाएं, सुरक्षित धरा पर्यावरण बनायें। यदि हर घर का एक सदस्य पौधारोपण की दिशा में कार्य करना प्रारंभ कर दे तो हमारे चारों ओर हरियाली ही दिखेगी। दूसरों का इंतजार करने के बजाय खुद इस दिशा में पहल करें। वक्त पुकार रहा है, आगे बढ़ें। कहीं देर न हो जाये।


आसिया फारूकी

राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, फतेहपुर (उ0प्र0)

मोबा.  : 91408-18635