"हाल ए दिल "

पात शबनम पड़ी मन मचलने लगा |

फिर हवा वो चली तन बिखरने लगा ||

दिल बहकने लगा क्या पता क्या हुआ |

अब जो तुम न मिले सब बिखरने लगा ||

पहली बरसात मे इश्क तुमसे हुआ |

ख्वाब दरिया मोहब्बत का दिखने लगा||

फूल राहों मे कांटा चुभता गया |

मै बिखरती गई वो संभलने लगा ||

क्या खबर क्या पता था नया रास्ता |

हाल ए दिल का कुमार कहने लगा ||


कवि कुमार प्रिंस रस्तोगी 

लखनऊ,उत्तर प्रदेश...