प्रकृति शक्ति रौद्र रूपा

हे प्रकृति तुम शिव की शिवा हो

निर्मल शीतल ममतामई 

जगत जननी जगदम्बा हो

वसुंधरा का तुम हो श्रृंगार


शक्ति का रूप धरकर

महिषासुर का किए संहार

रौद्र रूप मे तुम काली हो

रक्तबीज का रक्त पीकर

जगत का किया कल्याण


हे प्रकृति_शक्ति_रौद्र_रूपा

जब जब हमने सृष्टि का सन्तुलन बिगाड़ा

तब तब हम पर ऐसी विपदा आई

हम अज्ञानी अभिमानी पापी है

शीतला मां बन्द करो नरसंहार


प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश