"हम और हमारी जिम्मेदारी"

 प्रकृति पर हमारा पूरा जीवन निर्भर है. प्रकृति का संरक्षण करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है. प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना हमारे लिए भयावह स्थितियों को जन्म दे सकता है. वर्तमान समय में पूरा विश्व कोरोना जैसी भयंकर महामारी से जूझ रहा है. यह प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का ही दुष्परिणाम है. देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह कम से कम एक पेड़ जरूर लगाएं. जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहे और ऑक्सीजन की कमी ना होने पाए. वृक्ष से ही जीवन है. इसके साथ-साथ अपने आसपास गंदगी ना फैलाएं और सफाई का ध्यान रखें.

 चार पंक्तियां समर्पित है,

 हरा भरा परिवेश हो. हरा भरा परिधान.

 जिससे जीवन में रहे. हर प्राणी के जान.

 हरियाली संजीवनी. जीवन में वरदान.

 हरे भरे परिवेश से. ही होता है कल्याण.

 चारों ओर हरा भरा परिवेश मानव जाति के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. पशु पक्षी के लिए प्रकृति का साथ होना अत्यंत आवश्यक है. हमें अपनी जिम्मेदारी को पूरी तन्मयता से निभाने की जरूरत है.

 आओ एक संकल्प ले----

 "धरती पर जीवन बचाना है.

 तो सबको एक- एक पेड़ लगाना है. 

अपना संकल्प निभाना है .

प्रकृति को समृद्ध बनाना है."

लेखिका /रचनाकार: रीता तिवारी "रीत"

मऊ, उत्तर प्रदेश से