रोटी की कीमत

दो अक्षरों का नाम ये रोटी काम बहुत गहरा करता।

क्षुधा तृप्ति का यह साधन बस मानव को जिंदा रखता।।


मोल इसका केवल दो पैसा पर इसके विना न चलना काम।

राज रंक और फकीर का इस रोटी सी हीं चलना काम ।।


इस रोटी के चक्कर मे किसान घिस रहे बैल समान।

दुधमुंहे बच्चे तक को भेजे करने रोटी का इंतजाम।।


इस रोटी की महिमा निराली छिना झपटी की भी होती बात।

कभी मुट्ठी भर आटा देकर साध लेते लोग राजनीति खास।।


गंगू के बहते पसीने का ये रोटी ही तो कारण खास।

उसकी गुड़िया बिलख बिलख कर नैन गड़ाये राह पर खास।।


रोटी की आड़ में बहसि साध रहे हैं मकसद खास।

उनकी तो बस एक ही चाहत जग को कैसे लुटे आप।।


हाँ रोटी की हमें जरूरत भरना  अपने सहित परिवार का भूख।

ईश्वर से कर जोड़ प्राथना  हरते रहना संसार का भूख।।


पेट आग जब शांत रहेगा मानव में होगा सौहार्द।

रिस्तो में होगी गरमाहट आपस का बढ़ेगा सौहार्द।।


श्री कमलेश झा

नगरपारा भागलपुर