रिश्ते ये एहसास के

जब माँ बेटी मिल रहती हैं

सुख दुख एक दूजे से कहती हैं

बेटी माँ का दर्द जानती है

माँ भी हार कहाँ मानती है l


माँ बेटी को पढ़ाती है

अच्छी औरत बनाती है

फिर आए जब उम्र शादी की

उसका घर बसाती है l


फिर कभी कभी होता मिलन बेटी से

उससे दुख सुख करती है

बेटी की हर एक खुशी के लिए

माँ पल पल मरती है l


मिलती हैं फिर दोनों ऐसे

जैसे रब जी मिल गए हैं

देखो माँ - बेटी के चेहरे पर

खुशी में आंसूं निकल गए हैं l


करमजीत कौर,शहर-मलोट

जिला-श्री मुक्तसर साहिब, पंजाब