दो टूक : कहें किससे

नासमझ हाथ में पतवार है कहें किससे।

नदी में तेज बहुत ज्वार है कहें किससे।


मार मल्लाह कर रहे हैं मछलियों खातिर,

सामने हर तरफ  मझधार है कहें किससे।


जिसको सुननी है फरियाद हमारी तेरी,

उसी के हाथ में तलवार है कहें किससे।


यहाँ बस खास की तकलीफ सुनी जाती है,

ज़िन्दगी आम की दुश्वार है कहें किससे।


जिसके जिम्मे है सच्चाई की तरफदारी,

वही चोरों का तरफदार है कहें किससे।


हमारे हाथ पे है  सिर कटा हमारा पर,

वजीरे शहर  जिम्मेदार है कहें किससे।


हाल बीमार का ना ठीक है मगर धीरु,

डाक्टर खुद बहुत बीमार है कहें किससे।


धीरु भाई ( धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव )