समय समय की बात

समय समय का फेर है,

समय समय की बात,

आज ये समय निकल गया तो,

कल तुम्हारे हाथ।

अभी समय तो बुरा चला है,

ना घबराना आप,

जिसने रची है दुनिया सारी,

हरेंगें वो संताप।

समय का चक्रव्यूह ही हमको,

आइना दिखाता है,

हमको हमारी झूठी सच्ची,

हर पहचान बताता है।

कभी हॅंसाता कभी रुलाता,

कभी हौंसला दिलाता है,

हर हाल में ही ये समय, 

हमको जीना सिखाता है।

समय ने ऐसी बाजी पल्टी,

महामारी का संकट ले आया,

अमीर हो या चाहे गरीब,

सबको अपना शिकार बनाया।

समय बुरा यह आया है जो,

जल्द ही निकल जायेगा,

फिर से हम सबके जीवन में,

खुशी के रंग भर जायेगा।


चंपा पांडे,वरिष्ठ कवयित्री,

अल्मोड़ा,उत्तराखंड

दूरभाष 9990868117