टॉय कैथॉन 2021 - भारत को खिलौना निर्माण का वैश्विक हब बनाने की रणनीति

आत्मनिर्भर भारत अभियान में लोकल फॉर वाेकल के तहत भारत को खिलौना निर्माण में वैश्विक हब बनाने का रणनीति रोडमैप सराहनीय - एड किशन भावनानी

गोंदिया - भारत की 135 करोड़ जनता ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर को जन भागीदारी मंत्र के साथ रोकने में सफलता प्राप्त कर रहे हैं और तीसरी लहर को भी विफल करने और अर्थव्यवस्था को खोलने के लिए जनभागीदारी का मंत्र लगातार अपनाने के लिए संकल्पित हैं।...बात अगर हम अर्थव्यवस्था को खोलने और 5 ट्रिलियन अमेरिकन डॉलर की अर्थव्यवस्था का हमारा सपना साकार करने के लिए आत्मनिर्भर भारत, लोकल फॉर वोकल बनना है। हर भारत वासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है।हमें न सिर्फ लोकल प्रॉडक्ट्स खरीदने हैं, बल्कि उनका गर्व से प्रचार भी करना है। हमें पूरा विश्वास है कि हमारा देश ऐसा कर सकता है। लोकल से ग्लोबल बनने का यह बड़ा अवसर, इसलिए लोकल के लिए वोकल रहें...। बात इशारों में समझने की है कि जिस तरह भारत ने 300 से अधिक चीनी ऐप पर बंदिश लगाई है वैसे ही हमने खिलौने बाजार पर भी रणनीतिक रोडमैप पर काम शुरू कर दिया है...। बात अगर हम टॉयकै थॉन- 2021 जो कि वर्चुअल आयोजन 22 जून से 24 जून 2021 तक किया गया, पीएमओ के अनुसार शिक्षा मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय , उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, कपड़ा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद टॉय कैथॅन-2021 की संयुक्त रूप से शुरुआत की थी। आर्टिकल बनाने में पीएमओ की प्रेस रिलीज और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सहायता दी गई है।भारत से लगभग 1.2 लाख प्रतिभागियों ने टॉय कैथॅन 2021 के लिए पंजीकरण कराकर 17 हज़ार से अधिक नए विचार रखे, जिनमें से 1,567 विचारों को 22 जून से 24 जून तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ऑनलाइन ‘टॉय कैथॅन ग्रैंड फिनाले' के लिए चुना गया था। कोरोना संबंधी प्रतिबंधों के कारण इस कार्यक्रम में डिजिटल खिलौनों को लेकर विचार रखने वाली टीमें शामिल हुई, जबकि गैर-डिजिटल खिलौनों की अवधारणाओं के लिए एक अलग समारोह आयोजित किया जाएगा, जो ऑनलाइन नहीं होगा। भारत के घरेलू बाजार के साथ -साथ वैश्विक खिलौना बाजार देश में विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर पैदा करता है। टॉय कैथॅन 2021 का उद्देश्य भारत में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना है। चर्चा में एमएसएमई डीपीआईआईटी, कपड़ा मंत्रालय, सूचना-प्रसारण मंत्रालय और एआईसीटीई भी शामिल हुए।टॉय कैथॉन-2021 घरेलू बाजार के अलावा दुनिया के खिलौना बाजार में हमारे मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अवसर प्रदान करता है। इसका उद्देश्य भारत में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना है, ताकि भारत खिलौनों का हब बन सके। उल्लेखनीय है कि खिलौना बाजार से चीन की छुट्टी पूरी तरह से करने की तैयारी कर ली गई है, जिसके मद्देनजर खुद पीएम खिलौना मैन्युफैक्चरिंग प्रोत्साहन योजना की समीक्षा कर रहे हैं। वो सिर्फ घरेलू खिलौना बाजार में ही नहीं बल्कि दुनिया भर के बाजारों में खिलौनों पर भारतीयता का उत्कृष्ट छापदेखना चाहते हैं। वो ऐसे खिलौने बनाने का आह्वान कर चुके हैं, जिसमें एक भारत श्रेष्ठ भारत की झलक हो। उन खिलौने को देखकर दुनिया भर के लोग भारतीय संस्कृति, पर्यावरण के प्रति हमारी गंभीरता और भारतीय मूल्यों को समझ सकें। इसके अलावा, खिलौना उत्पादन में घरेलू कार्यों को भी प्रोत्साहित करने कोउन्होंने कहा है,जो उचित है। खास बात यह कि यह सेक्टर सालाना 15 फीसदी दर से ग्रोथ हासिल कर रहा है। देखा जाए तो खिलौना उद्यम के तहत देश भर में करीब 1500 कंपनियां संगठित और इसके दो गुणा अधिक असंगठित क्षेत्र की हैं। बावजूद इसके, देश में खिलौने की मांग की 30 फीसदी आपूर्ति ही भारतीय कंपनियां कर पा रही हैं, जबकि 50 फीसदी मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से खिलौना आयात किया जाता है। मौजूदा हालात के बावजूद, भारत में सबसे ज्यादा खिलौने चीन से आयात किए जाते हैं। भारतीय खिलौना कंपनियां निर्माण के लिए अब भी परंपरागत तरीके पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कारोबारियों के लिए देश में अवसर है क्योंकि, वर्तमान में भारत की कुल आबादी में 21 फीसदी की उम्र 2 साल से कम है और अनुमान है कि साल 2022 तक 0 से 14 साल के उम्र के बीच बच्‍चों की कुल आबादी करीब 40 करोड़ होगी। इसलिए भारतीय खिलौना बाजार के सामने बड़े अवसर होंगे। देखा जाए तो,इस बात में कोई दो राय नहीं कि देश में खिलौना निर्माण के कई कलस्टर हैं, जिनकी अपनी पहचान है और वहां पर सैंकड़ों कारीगर अपने अपने तरीके से स्वदेशी खिलौनों का निर्माण कर रहे हैं। अमूमन, ये घरेलू कारीगर जो खिलौना बनाते हैं, उनमें भारतीयता व हमारी संस्कृति की स्पष्ट छाप होती है, अद्भुत झलक मिलती है। यही वजह है कि इन कारीगरों और खिलौना निर्माण के कलस्टर को नए विचारों व सृजनात्मक तरीके से प्रोत्साहित करने की जरूरत है। यही नहीं, तकनीक और नए आइडिया वाले खिलौनों केनिर्माण के दौरान हमें उत्पाद की गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए, ताकि वे वैश्विक मानकों को पूरा कर सकें।...बात अगर हम इसके पूर्व कि 27 फरवरी 2021 को 4 दिन की भारत खिलौना मेला ( द इंडिया टॉय फेयर 2021) का वर्चुअल सम्मेलन की करें तो,भारत खिलौना मेला 2021 के आयोजन कार्यक्रम में पीएम ने कहा था, आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले 'चतुरंग या चादुरंगा' के रूप में भारत में खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब 'पच्चीसी' के रुप में खेला जाता था। हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है। ज्यादातर भारतीय खिलौने प्राकृतिक और इको फ्रेंडली चीजों से बनते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं।देखा जाए तो भारतीय बाजार चीनी खिलौनों से अटा पड़ा हैं। इसके बावजूद खिलौना उद्यम में अवसरों की कोई कमी नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मोदी जी ने लोकल फॉर वोकल का नारा दिया है। लोकल फॉर वोकल के जरिए पीएम ने देश की जनता को देश में बनें उत्पादों को खरीदने के लिए और देश में ही उत्पादों का निर्माण करने का संदेश दिया है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम देखेंगे कि टॉय कैथान-2021 भारत को खिलौना निर्माण का वैश्विक हब बनाने की एक रणनीति है और आत्मनिर्भर भारत अभियान में लोकल फॉर वोकल के तहत भारत को खिलौना निर्माण का वैश्विक हब बनाने की का रणनीतिक रोडमैप सराहनीय है।

-संकलनकर्ता- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र