डब्ल्यूवी रमन के कोच पद से हटने से CAC पर भी उठे सवाल

पूर्व सलामी बल्लेबाज डब्ल्यू वी रमन के भारतीय महिला टीम के मुख्य कोच पद से हटने के बाद मदन लाल की अगुवाई वाली क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) नीतू डेविड की अगुवाई वाली चयन समिति भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) के निशाने पर आ गए हैं। रमन की कोचिंग में भारतीय महिला टीम ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी। उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ कोच में से एक माना जाता है। मदनलाल, सुलक्षणा नाइक और पूर्व तेज गेंदबाज आरपी सिंह की सीएसी ने उनकी जगह इस जिम्मेदारी के लिए फिर से रमेश पोवार को चुना। पोवार को इस पद से 2018 में हटा दिया गया था। मदन लाल की समिति पर लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक आयोग्य होने के सवाल उठ रहे हैं।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'मद्दी पाजी(मदन लाल) ने इस साल 20 मार्च 2021 को अपना 70वां जन्मदिन मनाया था। बीसीसीआई ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों में कुछ सुधारों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में 70 साल की आयु-सीमा को हटाने की मांग नहीं की है। ऐसे में मदन लाल को सीएसी की बैठक में बैठने की अनुमति कैसे दी गई? इसी तरह सीएसी की एक अन्य सदस्य सुलक्षणा नाइक मुंबई क्रिकेट संघ के अध्यक्ष संजय नाइक की छोटी बहन हैं। पोवार हाल ही में सैयद मुश्ताक अली टी-20 घरेलू टूर्नामेंट में मुंबई के कोच थे।'

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि जिस तरह से आठ उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए गए, उससे पता चलता है कि नाइक ने पहले ही मन बना लिया था कि महज एक खराब सीरीज के बाद रमन को कोच बरकारार नहीं रखना है। वह इस बात को भी जानती थीं कि टीम चयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। टीम का चयन नाइक की पूर्व टीम साथी नीतू डेविड के अगुवाई वाली समिति करती है। सूत्र ने बताया, 'रमन से एक आश्चर्यचकित करने वाला सवाल पूछा गया कि जिस टीम का गठन पोवार ने किया है, उसके टी-20 विश्व कप के फाइनल में पहुंचने का श्रेय वह कैसे ले सकते है।' इस सवाल से ही पता चल जाता है कि पोवार का कोच बनना लगभग तय था।

उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर पोवार और मिताली राज के बीच समस्या थी और उस समय पोवार को हटाया जाना सही नहीं था तो क्या दो गलती को एक सही फैसले में बदला जा सकता है।' उन्होंने कहा, 'नाइक ने रमन की सफलता का श्रेय जिस तरह से पोवार को दिया, क्या उसी तरह पोवार को रमन की तैयार की हुई टीम नहीं मिल रही।' इससे पहले दक्षिण अफ्रीका सीरीज के दौरान टीम चयन को लेकर रमन और नीतू डेविड के बीच मतभेद हुए थे।

पीटीआई भाषा को कई सूत्रों से पता चला है कि रमन ने युवा बल्लेबाजी सनसनी शेफाली वर्मा को वनडे सीरीज और अनुभवी तेज गेंदबाज शिखा वर्मा में टी-20 इंटरनेशनल और वनडे सीरीज के लिए नहीं चुने जाने पर नाराजगी जताई थी। इस मामले पर रमन और नीतू की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'क्या आपको पता है कि शिखा और शेफाली को हटाने के लिए किस तरह के तर्क दिए गए थे? यह तुलना करने से भी परे है।'

चयनकर्ताओं ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन में शिखा का वजन बढ़ गया है लेकिन उन्हें जब यह साबित करने के लिए कहा गया तो वह ऐसा नहीं कर सकीं। उन्होंने बताया कि शेफाली के खराब फील्डिंग का हवाला देते हुए उसे वनडे टीम में नहीं चुना गया। इस पर कोच रमन ने सवाल किया, 'अगर खराब फील्डिंग के कारण वनडे में जगह नहीं मिलती तो फिर टी-20 टीम में क्यों, टी-20 में फील्डिंग का और ज्यादा महत्व है।'

टीम में सी प्रत्युशा और बाएं हाथ की मध्यम गति की गेंदबाज मोनिका पटेल के चयन पर भी सवाल उठे। दोनों का संबंध बेंगलुरु स्थित फाल्कॉन क्लब से है। बीसीसीआई शीर्ष समिति में शामिल शांता रंगास्वामी इसकी सदस्य और संस्थापक सचिवों में से एक हैं। उन्होंने कहा, 'हम उनके चयन पर सवाल नहीं उठा रहे लेकिन यह बुरे संयोग की तरह है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मैं केवल यही उम्मीद करूंगा कि सौरव गांगुली और जय शाह इन बातों पर ध्यान देंगे। हमें इस साल विश्व कप खेलना है। दोनों को अब से हर चयन बैठकों पर नजर रखनी चाहिए। रमन ने गलत चयनों की कीमत चुकाई है।'

ज्यादातर लोग मानते है कि अपने समय में कलात्मक बल्लेबाल रहे रमन ने कोच के तौर पर अच्छा काम किया लेकिन विरोधियों ने उन पर अभ्यास सत्र के दौरान ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया। रमन विरोधी खेमे के एक सदस्य ने कहा, कुछ खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि अभ्यास के दौरान वह कई बार वहां से हट जाते थे। कुछ खिलाड़ियों को लगता था कि किसी-किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन की सराहना नहीं करते थे। राजेश्वरी गायकवाड़ लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही थी लेकिन रमन ने कभी उनकी तारीफ नहीं की।' उन्होंने बताया कि रमन ने पहले ही डेब्यू कर चुकीं विकेटकीपर बल्लेबाज नुजहत परवीन को डेब्यू कैप दी थी जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है।