कोरोना मरीज के अलावा और किन्हें है ब्लैक फंगस का ज्यादा खतरा, डॉक्टर ने दी जानकारी

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच अब ब्लैक फंगस की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार के अनुसार अब तक देश में ब्लैक फंगस या म्यूकोर्मिकोसिस के करीब 8 हजार से ज्यादा के मामले सामने आ चुके हैं। अभी तक गुजरात, सूरत, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इसके मामले देखने को मिल रहे हैं। कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरॉयड का गलत तरीके से इस्तेमाल भी ब्लैक फंगस का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

कोरोना मरीज के अलावा इन्हें भी है ब्लैक फंगस का ज्यादा खतरा- 

विशेषज्ञ डॉक्टर के अनुसार, श्फंगल इंफेक्शन कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह महामारी अब बहुत तेजी से बढ़ रही है।  हम सटीक कारण नहीं जानते कि यह महामारी के अनुपात में क्यों पहुंच रहा है लेकिन हमारे पास यह मानने के लिए कई कारण हैं। 

इसमे अनियंत्रित डायबिटीज, इलाज के दौरान टोसीलिजुमैब के साथ स्टेरॉयड का ठीक तरीके से नहीं इस्तेमाल, वेंटिलेशन पर रहने वाले मरीज और सप्लीमेंट ऑक्सीजन लेना शामिल हैं। कोरोना इलाज के छह हफ्तों के भीतर यदि इनमें से कोई फैक्टर हैं तो मरीज में ब्लैक फंगस होने का सबसे ज्यादा रिस्क है।

ब्लैक फंगस इन्हें सबसे पहले करता है अटैक-

ब्लैक फंगस  चेहरे, संक्रमित नाक, आंख के अलावा मस्तिष्क को प्रभावित करता है। इसवजह से आंखों की रोशनी  भी जा सकती है। यह फेफड़ों में भी फैल सकता है। यह फंगल इंफेक्शन, आमतौर पर मिट्टी, पौधे, खाद और सड़े हुए फलों और सब्जियों में पाए जाते हैं। यह दिमाग, साइनस, फेफड़ों पर असर डालता है और डायबिटीज से पीड़ित एवं कम इम्यून सिस्टम वाले मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है।

किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है ब्लैक फंगस-

संक्रमण किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है। अधिकांश लोग कभी न कभी इस फंगस के संपर्क में आएंगे। लेकिन जिनकी  इम्यूनिटी कमजोर है उन्हें यह तेजी से अपना शिकार बना रहा है।

बचाव कैसे करें 

-मधुमेह को नियंत्रण में रखो।

-स्टेरॉईड का अतिरिक्त सेवन न करें।

-ऑक्सिजन मास्क को स्वच्छ रखे।

-म्यूकोर्मिकोसिस से पीड़ित व्यक्ती के संपर्क में न आए।

-इस प्रकार के संक्रमण को रोकने के लिए हैल्थी डाइट लें।

- लक्षण सामने आते ही डाॅक्टरसे संपर्क करें।

-कैंसर के मरीज, एड्स और अगर किसी मरीज का अंग प्रत्यारोपित किया गया है। या स्टेम सेल ट्रान्सप्लांट हुआ है। ऐसे मरीज को फंगल इन्फेशन का खतरा होता है।