किस बात का अभिमान?


अपनी खूबसूरती, शारीरिक सौष्ठव,

प्रतिभा, चुस्ती - चालाकी,

धन-दौलत, विद्या-बुद्धि,

ऊंचे कुल, राजसी ठाठ-बाट,

बाहुबल, शक्तिशाली ओहदे,

कार्य-कुशलता, वाग्विदग्धता,

सत्ता, नाम - प्रसिद्धि,

सफलताओं एवं उपलब्धियों पर 

जब कभी मन में

ज्यादा आने लगे गुमान,


तो इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी से

थोड़ा सा समय निकाल कर

घूम आना अपने आस-पास के

दो-चार शमशान,


देखकर वहां फैली चिता की राख,

जलने वालों के पद, हैसियत,

शक्ति, बुद्धिमत्ता ,मूर्खता और

धन-संपत्ति का लगाना अनुमान,


एक सी ही दिखेगी राख,

पंचभूतों से लिया है 

सब मनुष्यों ने आकार

और वापस करना ही है 

जब हमनें यह उधार,

तो फिर करना क्यों 

ऐसा भेदभाव इंसान दर इंसान,


ब्रह्मांड के अनगिनत वर्षों के सामने

अपने छोटे से जीवन की

उपलब्धियों के बारे में डींगे हांक

हासिल कर क्या लेंगे हम,

किस बात का करें हम फिर अभिमान?


जितेन्द्र 'कबीर'

संपर्क सूत्र - 7018558314