भगवान परशुराम जयंती-शत शत नमन

भगवान परशुराम का अवतरण दिवस है आज।

मना रहा जयंती देश ही नहीं पूरा विश्व है आज।

त्रेता युग रामायण काल में ऋषि के घर में जन्मे।

महर्षि भृगु  पुत्र महर्षि जमदग्नि के यज्ञ से जन्मे।

पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इंद्र वरदान स्वरूप।

माता रेणुका के गर्भ से जन्मे धर परशुराम रूप।

वैशाख शुक्ल तृतीया को मानपुर,इंदौर- एमपी।

जानापाव पर्वत में हुआ है बनी रेणुका पुत्रवती।

पितामह भृगु ने नामकरण संस्कार से कहा राम।

शिवजी प्रदत्त परशु धारण से होगये ये परशुराम।

प्रारंभिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र-ऋचीक पढ़ाये।

ऋचीक से शारङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष पाये।

महर्षि कश्यप ने अविनाशी वैष्णव मन्त्र सिखाये।

कैलाश गिरिश्रृंग स्थित शिव आश्रम भी ये ध्याये।

शिवजी श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच दिये।

स्तवराज स्तोत्र व मन्त्र कल्पतरु भी प्रदान किये।

त्रैलोक्य स्वामी अंतर्यामी प्रभु से ये शिक्षा हैं पाये।

ऐसे महा ऋषियों मुनियों से परशुराम विद्या पाये।

चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रभु विष्णु प्रसन्न।

त्रेता में रामावतार होने के उपरांत तेजोहरण कर।

परशुराम को वर दिये रहें पृथ्वी पर जीवन पर्यन्त।

तपस्यारत भूलोक पर परशुराम  कल्पान्त पर्यन्त।

शस्त्र विद्या के महान गुरु थे ऋषिपुत्र ये परशुराम।

भीष्म द्रोण व कर्ण को ये शस्त्रविद्या किया प्रदान।

परशुराम ने ही कर्ण को क्रोध में आके दिया श्राप।

इनके क्रोध से सभी थर्राते थे क्रोधी बहुत थे आप।

रचेएकादश छन्दयुक्त शिव पंचत्वारिंशनाम स्त्रोत।

अत्रि स्त्री अनसूया अगस्त स्त्री लोपामुद्रा  सह्योग।

प्रिय शिष्य अकृतवण तीनों के सहयोग से चलाये।

विराट नारी-जागृति अभियान संचालित करवाये।

कल्कि अवतार होने पे उनका गुरुपद ग्रहण किये।

उनको भी शस्त्र विद्या भगवान परशुराम जी दिये।

परशुराम भगवन को चिरंजीवी होने का है वरदान।

शत शत नमन हमारा उनको शत शत मेरा प्रणाम।

रचियता :

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

इंटरनेशनल चीफ एग्जीक्यूटिव कोऑर्डिनेटर

2021-22,एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,प.बंगाल

संपर्क : 9415350596