दो टूक

हर हिंसक

अपने विरोधी की हिंसा को 

लोकतंत्र के लिए

खतरा

और अपनी हिंसा को 

लोकतंत्र के लिए

वरदान बताता है

अपने पालतू हिंसकों को

इन्सान बताता है

लेकिन अहिंसा की नज़र में

हिंसा 

इस हिंसक की हो

या उस हिंसक की

हिंसा हर स्थिति में

हिंसा है

हर हिंसा का

विरोध कीजिए

हर हिंसक से

क्रोध कीजिए।

- धीरु भाई