बिहार : अस्पतालों में शोपीस बनीं वेंटिलेटर मशीनें, खा रही जंग

दरभंगा: देशभर में कोरोना ने कोहराम मचा रखी है, बिहार भी इससे अछूता नहीं है. सरकार लगातार कोरोना महामारी से लड़ाई के लिए स्वास्थ्य विभाग को चुस्त-दुरुस्त होने का दावा भी करती है लेकिन जमीनी स्तर पर अस्पताल की हकीकत कुछ और ही बया करती है. दरभंगा के अनुमंडल अस्पताल में नई चार वेंटिलेटर मशीनें जंग खा रही हैं. ये मशीनें पिछले साल अस्पताल को मिली थीं, लेकिन कोरोना काल में भी सक्रियता नही दिख रही.

दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडल अस्पताल में कहने को तो कोरोना बीमारी से लड़ने की पूरी तैयारी है लेकिन एक हकीकत यह भी है कि 2020 में जो चार नए वेंटिलेटर अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने मुहैया कराए थे, उसे कई महीने बीत जाने के बाद भी आज तक इंस्टॉल तक नही किया गया. अस्पताल में नया वेंटिलेटर न सिर्फ शोभा की वस्तु बना है बल्कि मशीन में अब जंग भी लगने लगी है. एक तरफ कोरोना संक्रमण मरीज के जीवन पर एक एक सांस भारी पर रहा है जीवन रक्षक वेंटिलेटर नही मिलने के कारण कई मरीजों की मौत हो रही है लेकिन यहां तो जीवन देने वाली मशीन की ही मौत होती दिखाई दे रही है. ऐसा नहीं है कि इस मशीन की यहां जरूरत नहीं है, जरूरत तो है लेकिन संसाधन और मैनपावर की कमी के साथ-साथ दृढ़इच्छा शक्ति की कमी के कारण लाखों की मशीनें बर्बाद हो रही हैं.

खुद अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी की मानें तो यहां न तो ICU है, न ही इसे चलाने और देख-रेख करने की कोई व्यवस्था है, यही वजह है कि वेंटिलेटर अब तक इंस्टॉल नहीं किया जा सका है. हालांकि, वो खुद भी मानते हैं कि कोरोना काल मे वेंटिलेटर जीवन रक्षक मशीन है लेकिन वे आखिर करें भी तो क्या?

अब सवाल यह है कि आखिर जब अस्पताल में इतनी कमी है तो इसे समय रहते दूर क्यों नही किया गया और सबसे अहम बात अगर मशीन का यहां तत्काल कोई काम नही तो इसे जहां जरूरी है, वहां क्यों नही भेज दिया जाए ताकि कहीं और किसी की कोरोना से तत्काल जान तो बचाई जा सके. वहीं इलाके के जागरूक लोग ओर समाजसेवी ने इसे सरकार के साथ-साथ अस्पताल प्रशासन की लापरवाही मान आक्रोशित दिखाई दे रहे हैं. उनकी मानें तो सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधि ऐसे महामारी में भी इस तरह लापरवाह रहेंगे तो भला आम लोगों का क्या होगा इसका सिर्फ अंदाज ही लगाया जा सकता है.