सम्मान अपना -अपना

 एक बार तुम समझ गये की पिज्जा गोल क्यों होता है। वहीं एक बार तुम समझ गये की पिज्जा का डिब्बा जिसमें कि पिज्जा पैक करके आप तक पहुंचता है वह चौकोर क्यों है। इतना ही नहीं जब पिज्जा गोल हो और उसका डिब्बा जिसमें वह आता है वह चौकोर हो और पिज्जा की कटिंग तिकोनी हो।जब आप एक पिज्जा की इतनी सारी विशेषताएं समझ जायें तब आप एक स्त्री को आसानी से समझ जायेंगे। जाइये पहले पता लगातार आईये कि पिज्जा गोल क्यों है बॉक्स चौकोर क्यों है और पिज्जा को तिकोना क्यों काटा गया। इसका उत्तर किसी के पास होता तो महिलाओं के लिये इतनी हास्यास्पद बात नहीं करते।अरे भई,भगवान ब्रम्हा,विष्णु और महेश संपूर्ण पृथ्वी का हाल जान सकते है लेकिन स्त्री के मन की बात या थाह नहीं जान सकते।तब तुम तो साधारण मनुष्य हो।इसीलिये पिज्जा के और उसके डिब्बे के आकार के साथ ही उसकी कटिंग पर ही उलझे हुए हो और व्यर्थ समय नष्ट कर रहे हो।जिस महिला के साथ तुम संपूर्ण जिंदगी बिता देते हो क्या उसे समझ पाये हो।पहले स्त्री के हृदय को समझो फिर उसके दिमाग को पढ़ने की चेष्टा करना। यह तो एक मात्र उदाहरण है ऐसे और ना जाने कितने उदाहरण हमारे सामने आये दिन आते रहते हैं जब महिलाओं को हंसी या मजाक का पात्र बनाया जाता है।अक्सर हम विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में एवं सामाजिक माध्यम पर देखते हैं कि महिलाओं का विभिन्न तरीके से मजाक बनाया जा रहा है या उन्हें हंसी और उपहास का पात्र बनाया जा रहा है। महिलाओं नें अपने आपको हर स्तर पर सिद्ध करा है। महिलायें किसी भी स्तर पर पुरुषों से पीछे या कम नहीं हैं।फिर भी महिलाओं का उपहास बनाना बंद नहीं हुआ। कुछ महिलायें इस तरफ ध्यान ही नहीं देतीं की कोई उनके बारे में क्या बोल रहा है वह सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करती हैं। कुछ महिलायें संवेदनशील होती हैं इसलिये उन्हें ऐसी बातें पसंद नहीं आती हैं । और वहीं कुछ महिलाओं को कोई फर्क ही नहीं पड़ता है।पिज्जा के तिकोने टुकड़े की भांति महिलाओें को भी तीन अलग-अलग बिंदुओं में बंट कर भी तीन  रेखाओं से जुड़कर उस तिकोने पिज्जा के टुकड़े की भांति एक हो जाना चाहिये।हम सभी जानते हैं एकता में बहुत शक्ति होती है। नारी शक्ति को एक रहते हुए मजाक का पात्र बनने से स्वयं को रोकना और किसी को मजाक बनाने का मौका भी ना देना और कोई मजाक बना रहा हो तो उसका हिस्सा नहीं बनना है यह प्रयास करना चाहिए।महिलायें मजाक की वस्तु नहीं हैं। यह हमारे उस विशेष पुरुष वर्ग को जो इस प्रकार का व्यवहार करते हैं उन्हें समझना होगा। मजाक किसी भी माध्यम से हो रहा हो ,ऐसे पुरुष वर्ग को यह बात सदा अपनी स्मृति में रखना चाहिये कि सम्मान दो और सम्मान लो। अर्थात् जो इस संसार को आप देते हैं वही लौटकर आपके पास वापस आता है।महिला दिवस की सार्थकता तभी है जब अपने आस पास तथा परिवार की प्रत्येक महिला के मान सम्मान का पूरा ध्यान रखा जायेगा ना कि उन्हें हंसी या मजाक का पात्र बनाया जायेगा। हमारे पुरुष वर्ग में भी एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो इस तरह की बातों को पसंद नहीं करता है। उन्हें पुरजोर तरीके से इस बात को समाज के सामने रखना चाहिये कि वह इस तरह के कृत्य का समर्थन नहीं करते हैं। "जहां नारी की पूजा की जाती है वहां देवता निवास करते हैं"।नारी का सम्मान किजिए अपमान नहीं क्योंकि मजाक उड़ाना भी अपमान की श्रेणी में आता है।


वरिष्ठ साहित्यकार 

श्रीमती रमा निगम 

भोपाल म.प्र. 

nigam.ramanigam@gmail.com