करोना की शिकार हुई मां की मुखाग्नि दी बेटी ,वारिस कोई नही समाजसेवी द्वारा किया गया अंतिम संस्कार

आजमगढ़। दर्द, पीड़ा, वेदना जैसे ऐसे अनगिनत शब्दों का पर्याय बन चुके कोविड-19 ने अपना सितम जारी रखा है। कुछ ही दिन पहले एक मासूम बच्ची के पिता की सांसे कैंसर जैसी गंभीर बिमारी ने हमेशा के लिए शांत कर दिया था, अभी उसके कलेजे की आग ठंडी भी नहीं हो सकी थी कि शनिवार को उसकी मां का भी कोरोना से निधन हो गया। पहले से ही आर्थिक रूप से टूट चुकी मासूम के दर्द की इंतेहा तब हो गयी जब उसके पास कोरोना पाजिटीव मां के अंतिम संस्कार के लिए चंद सिक्के भी नहीं थे। जैसे ही सोशल मीडिया के जरिये इस बात की भनक विनीत सिंह रीशू, श्रीकृष्णा, पवन सिंह को हुई तो लोगों ने उसकी मदद के लिए आगे आये और राजघाट पर पहुंचकर उसकी मां के अंतिम संस्कार का पूरा प्रबंध किया तब जाकर मासूम बिटिया ने अपनी मां के पार्थिक शरीर को पंचतत्व में विलीन कर सकी।

बताया जाता है कि दिल्ली प्रांत के भजनपुरा की निवासी मृगया राय चौधरी के पिता  जीविकोपार्जन के लिए दो दशक पूर्व आजमगढ़ के महाराजगंज थानान्तर्गत प्रतापुर गांव में आ गये थे। जहां पर वे लोग छोटी सी दुकान और घर को किराये पर लेकर अपनी रोजी रोटी की पूर्ति करते थे। समय और बदलते हालात के बीच मृगया राय चौधरी के पिता को कैंसर हो गया और देखते ही देखते तीन माह पूर्व उनका निधन हो गया। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने जहां मृगया के सर से पिता का छाया छीन लिया वहीं घर की रसोई के चूल्हें की आग भी आर्थिक अभाव में ठंडे हो चुके थे। किसी तरह दुकान के सहारे एक समय का भोजन जुट पा रहा था। इसी बीच कोरोना महामारी के दूसरी लहर में मृगया के जीने का सहारा उसकी मां माया राय चौधरी संकमण की जद  में आ गयी। किसी तरह उसका उपचार अतरौलिया  के 100शैयायुक्त अस्पताल में चल रहा था कि शनिवार को क्रूर काल ने मां का भी छाया सर से छीन लिया। तीन माह पहले पिता और अब मां की मौत ने मृगया को अंदर से मानो खोखला कर दिया। मां के अंतिम संस्कार के लिए मृगया के पास फूटी कौड़ी भी नहीं थी। कोरोना पाजिटीव मां के शव को अपने लोगों ने ही छूने से इंकार कर दिया। इस बात की जानकारी कुछ  जनपद  के सामाजिक लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किया। जैसे ही यह जानकारी कोरोना काल में सबकी मदद के लिए तत्पर नजर आ रहे विनीत सिंह रीशू, श्रीकृष्णा, पवन सिंह, सैयद एहतेशाम, मो अमीर, मो सैफ को हुई तो उन्होंने शव को किसी तरह राजघाट पर मंगवाया है जहां अंतिम संस्कार का प्रबंध किया और मासूम को हिम्मत दिलाया। सामाजिक युवाओं का सहारा मिलने के बाद मृगया ने अपनी मां को मुखाग्नि दिया। मानवीय संवदेना की मिसाल बन चुके विनीत सिंह रीशू व उनके साथियों की जमकर तारिफ हो रही वहीं ऐसे मामलों के प्रति जिला प्रशासन की मूकदर्शक बने रहने की परम्परा से आमजन संवेदनहीनता पर सवाल दाग रहे है। वहीं विनीत सिंह रीशू ने लगातार जनपद के स्वास्थ्यों को ठीक करने के लिए  सोशल मीडिया से आवाज उठा रहे वहीं कोई भी समस्या आने पर खुद पीड़ितों की मदद के लिए दौड़ते नजर आ रहे है।