रास्ते

रास्ते, जो कभी समाप्त नहीं होते हैं ।

यह मैं, तुम और सभी जानते हैं ।।


भूलकर अतीत नव पथ पर चलना पड़ता है ।

उत्थान के लिए कठिनाइयों से लड़ना पड़ता है ।।


रास्ते के पश्चात रास्ते, कई नए रास्ते ।

जिंदगी में खुलते हैं, विकास के वास्ते ।।


छोटा मरीच जीवन में उजाला ला सकता है ।

पथ आपको मंजिल पर पहुंचा और भटका सकता है ।।


रास्ते निर्भर करते हैं, चलने का तरीका ।

हम पर निर्भर है, उद्धार - उत्थान आदि का सलीका ।।


पाते हैं, जो मंजिल संघर्षों की पथ पर चलकर ।

मरीच उनके जीवन का तम मिटाती स्वयं जलकर ।।


स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

महेन्द्र कुमार मध्देशिया

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